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खटीमा की बात :धामी को टक्कर देंगे दरगाह प्रमुख के दामाद, ओवैसी की पार्टी से लड़ेंगे चुनाव

@शब्द दूत ब्यूरो (29 जनवरी, 2022)

चुनाव में मुस्लिमों के हर वर्ग को जोड़ने की जद्दोजहद तेज हो गई है। सियासत से दूर आला हजरत खानदान से जुड़े लोग अब चुनावी मैदान में उतर रहे हैं। ऑल इंडिया मजलिसे इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने दरगाह आला हजरत प्रमुख सुब्हानी मियां के दामाद सय्यद आसिफ मियां को उत्तराखंड की खटीमा विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। सैय्यद आसिफ मियां ने उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी के सामने खटीमा विधानसभा सीट से नामांकन किया है।

आला हजरत दरगाह के प्रमुख सुब्हानी मियां के दामाद सैय्यद आसिफ मियां बरेली में रहते हैं। उत्तराखंड के खटीमा में भी उनका मकान है। आसिफ मियां आला हजरत के उर्स में प्रभारी भी रहते हैं। पर्चा दाखिल करते ही आसिफ मियां चर्चाओं में आ गए। आसिफ मियां का कहना है कि बहुत से लोग दरगाह के नाम को बदनाम कर रहे हैं। मैंने दरगाह के नाम का इस्तेमाल सियासत में कभी नहीं किया।

दरगाह आला हजरत खानदान के सदस्य हो या उनसे जुड़े लोग सियासत में अपने दांव पेंच दिखाते रहे हैं। 1975 में दरगाह आला हजरत से नसबंदी के खिलाफ आवाज बुलंद हुई थी, बाद में दरगाह के सज्जादानशीन मौलाना रेहान रजा खां को कांग्रेस सरकार ने एमएलसी बनाया था। मौलाना तौकीर रजा खां ने सात

अक्टूबर 2001 को आईएमसी तैयार का राजनीति की शुरुआत की थी। 2004 में आईएमसी सियासी मैदान में उतर आई और 2009 के लोकसभा चुनाव में आईएमसी ने कांग्रेस का साथ दिया था। 2012 के चुनाव में आईएमसी ने मंडल में प्रत्याशी उतारे थे। 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में आला हजरत खानदान के सदस्य मौलाना मन्नानी मियां ने बरेली सीट से चुनाव लड़ा था।

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