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काशीपुर : विरोध की चिंगारी के बीच आसान नही भाजपा के त्रिलोक सिंह चीमा का चुनावी रण

@विनोद भगत

(21 जनवरी 2022)

पिता के उत्तराधिकारी के रूप में काशीपुर विधानसभा सीट से भाजपा के घोषित प्रत्याशी त्रिलोक सिंह चीमा के लिए आसान नहीं होगा इस चुनावी रण में जीत हासिल कर पाना। दरअसल मौजूदा विधायक हरभजन सिंह चीमा भाजपा के तमाम दिग्गज दावेदारों को पछाड़ते हुये अपने पुत्र को टिकट दिलाने में तो कामयाब हो गये पर अभी आगे की डगर काफी मुश्किल है। देखा जाये तो असली लड़ाई अब शुरू होगी। खुद विधायक चीमा मानते हैं कि अभी उन्होंने 25 प्रतिशत लड़ाई जीती है। बाकी 75 प्रतिशत काम बाकी है। ये 75 प्रतिशत का इम्तिहान काफी भारी पड़ने जा रहा है। इसमें उन्हें अपने ही दल के भीतर संभावित विरोध की चिंगारी को भी शांत करना होगा। 

शहर के स्थानीय दिग्गजों के चुनाव लड़ने के मंसूबों पर बीस साल से पानी फिर रहा था। जब चीमा ने खुद चुनाव मैदान से हटने की घोषणा की तो अन्य दावेदारों को आस जगी थी कि बीस साल की चुनाव लड़ने की हसरत अब पूरी होने जा रही है। पर एकाएक अपने पुत्र को चुनाव मैदान में उम्मीदवार बनाने की कवायद शुरू करने के चीमा के प्रयासों पर एक बार फिर भाजपा के दावेदार आशंकित हो गये और अंततः उनकी आशंकाएं सच भी साबित भी हो गई। 

अब देखना होगा कि काशीपुर विधानसभा से भाजपा उम्मीदवार और मौजूदा विधायक के पुत्र त्रिलोक सिंह चीमा अपने पिता की विरासत को कितना संभाल सकते हैं। दरअसल हरभजन सिंह चीमा पिछले बीस वर्षों से सभी कयासों को नकारते हुए हर बार जीत का परचम लहराते रहे हैं। स्थानीय भाजपा नेताओं के विरोध के बावजूद चीमा का विजय अभियान जारी रहा। हरभजन सिंह चीमा चुनावी प्रबंधन के महारथी माने जाते हैं। चर्चायें यहाँ तक रही कि वह भाजपा संगठन से ज्यादा अपने चुनावी प्रबंधन की बदौलत जीतते रहे हैं। इस बार उनकी राजनीतिक विरासत को उनके कंधों पर देकर भाजपा हाईकमान ने तमाम दावेदारों को दरकिनार करते हुए एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है।

गौरतलब है कि इस बार चीमा को स्थानीय भाजपा नेताओं का अंदरखाने विरोध से भी जूझना होगा। कारण यह कि स्थानीय भाजपा नेता लंबे समय से प्रतिनिधित्व की आस में हैं। लेकिन इस घोषणा से उनके राजनीतिक मंसूबे धरे के धरे रह गये। इस बार भाजपा के अपेक्षाकृत नये उम्मीदवार त्रिलोक सिंह चीमा के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि अपरोक्ष रूप से हरभजन सिंह चीमा की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। इसलिए मौजूदा विधायक हरभजन सिंह चीमा जीत के सिलसिले को कैसे बरकरार रख पाते हैं? यह देखना दिलचस्प होगा और काशीपुर विधानसभा का चुनाव काफी रोचक होने जा रहा है।

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