@विनोद भगत
देवभूमि उत्तराखंड में पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध की तैयारी हो गई है। और विरोध भी धार्मिक स्थल से जुड़े एक वर्ग के द्वारा किये जाने से भाजपा की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के बनाये गये देवस्थानम बोर्ड ने इस बार भाजपा सरकार के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड आगमन पर स्वागत किया जाता था वहाँ विरोध होना बता रहा है कि भाजपा की राह आसान नहीं है।
बीते रोज केदारनाथ पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का जिस तरह से वहाँ विरोध हुआ। प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक का भी वहाँ विरोध किया गया। विरोध की इस चिंगारी की आंच प्रधानमंत्री मोदी के दौरे तक पहुंचना उत्तराखंड में आगामी सन्निकट चुनाव को लेकर खतरे की घंटी है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का देवस्थानम बोर्ड बनाकर भाजपा के लिए विरोध की एक वजह पैदा कर दी। हालांकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देवस्थानम बोर्ड भंग करने का वादा कर तीर्थ पुरोहित को साधने का प्रयास किया है। पर लगता है कि लंबे समय से की जा रही तीर्थ पुरोहितों की यह मांग भाजपा के लिए गले की हड्डी साबित हो सकती है।
चार धाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के प्रवक्ता डा. बृजेश सती ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड को लेकर सरकार की कथनी और करनी में अंतर सामने आ रहा है। सरकार ने ऐलान किया था कि समिति में तीर्थ पुरोहितों को शामिल किया जाएगा। बावजूद इसके जिन लोगों को समिति में शामिल किया गया है।
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