काशीपुर । काशीपुर महानगर कांग्रेस की कमान संभालने के बाद से संदीप सहगल की पुरजोर कोशिश रही है कि किसी तरह पार्टी को उसके पुराने सुनहरे दिन लौटाये जायें। लंबे समय से संदीप सहगल काशीपुर में कांग्रेस का पर्याय बनकर उभरे हैं। एक समय था जब काशीपुर में कांग्रेस का मतलब सत्येंद्र चंद्र गुड़िया होता था। उस दौर में कांग्रेस की तूती बोलती थी।
संदीप सहगल के युवा कंधो पर कांग्रेस पटरी पर लौटती नजर आ रही थी। इसमें कोई संदेह नहीं है कि संदीप सहगल ने पार्टी के लिए मेहनत भी की और अभी भी वह कर रहे हैं। बावजूद इसके उनके प्रयासों को पार्टी के कुछ लोग गाहे-बगाहे प्रश्न चिन्ह उठा कर उनके प्रयासों को पलीता लगा रहे हैं। महानगर कांग्रेस का अध्यक्ष पद संभालने के बाद संदीप सहगल ने कांग्रेस के पुराने और नये चेहरों के बीच सामंजस्य और तालमेल बिठाने की पुरजोर कोशिश की है।
समय और श्रम के साथ अपने निजी संसाधनो से कांग्रेस को पुनर्जीवित कर संदीप सहगल प्रदेश के नेताओं की गुड बुक में शुमार किये जाते हैं। स्थानीय स्तर पर भी संदीप सहगल युवाओं में ही नहीं पार्टी के सर्वमान्य नेता माने जाते हैं। आगामी विधानसभा चुनाव के लिए संदीप सहगल इस समय सबसे पहले नंबर पर हैं। हालांकि पार्टी के कुछ स्थानीय दिग्गजों के ताल ठोकने से स्थिति बड़ी विचित्र हो गई है। स्थानीय कांग्रेस अगर सारे पूर्वाग्रह त्याग कर एक मंच पर एक नेता के पक्ष में आ जाये तो इसमें कोई दो राय नहीं कि जीत का परचम लहरा सकती है।
मौजूदा सत्तासीन भाजपा में टिकट को लेकर चल रही अंतर्कलह कांग्रेस के लिये लाभदायक स्थिति पैदा कर रही है। अगर कांग्रेस भी टिकट को लेकर अंतर्कलह से उबर जाये तो पिछली कई पराजय का बदला कांग्रेस ले सकती है।
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