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काशीपुर: महावीर अखाड़े के नाम पर कौन खा गये पैसा? पहलवानों का आरोप, सुविधाओं का अभाव, कोच और संसाधनों की मांग, स्व ओमप्रकाश शर्मा पहलवान को किया याद, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (15 अप्रैल 2026)

काशीपुर। द्रोणासागर स्थित महावीर अखाड़ा में वर्षों से पहलवानी की परंपरा को आगे बढ़ा रहे युवाओं ने अब मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर आवाज उठाई है। शहर का यह प्राचीन अखाड़ा लंबे समय से स्थानीय और बाहरी पहलवानों को प्रशिक्षण देता आ रहा है, जहां से कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बनाई है।

अखाड़े में अभ्यास कर रहे पहलवानों का कहना है कि यहां करीब 20 युवा नियमित रूप से प्रशिक्षण लेते हैं, लेकिन उन्हें न तो उचित कोच मिल रहा है और न ही आवश्यक संसाधन। पहलवानों के अनुसार, मैट, गद्दे, जिम उपकरण और बाथरूम जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।

राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग कर चुके पहलवान अवतार सिंह ने बताया कि उन्होंने हाल ही में गाजियाबाद में आयोजित प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, लेकिन मिट्टी में अभ्यास करने के कारण मैट पर प्रदर्शन प्रभावित होता है। उनका कहना है कि यदि अखाड़े में आधुनिक सुविधाएं और प्रशिक्षित कोच उपलब्ध हों, तो खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

पहलवानों ने यह भी आरोप लगाया कि अखाड़े के नाम पर कई लोगों ने धन लिया, लेकिन अब तक विकास के लिए कोई ठोस कार्य नहीं किया गया। हालांकि, दिवंगत पहलवान ओम प्रकाश शर्मा के योगदान को याद करते हुए खिलाड़ियों ने बताया कि अखाड़े की कुछ बुनियादी संरचना उन्हीं की देन है।

अभ्यास कर रहे पहलवानों ने काशीपुर के जाने माने पहलवान ओमप्रकाश शर्मा को स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने इस अखाड़े के लिए जो योगदान किया वह अविस्मरणीय है। आपको बता दें कि स्व ओमप्रकाश शर्मा शहर के पहलवानों के लिए गॉडफादर की तरह थे। अपने जीवन काल में उन्होंने अपना पूरा जीवन कुश्ती और पहलवानों के प्रशिक्षण के लिए समर्पित कर दिया था।

वहीं, सेना में कार्यरत कोच लोकेंद्र सिंह, जो छुट्टियों में खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देते हैं, ने कहा कि इन युवाओं में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की पूरी क्षमता है, लेकिन सही दिशा और सुविधाओं की कमी उनके रास्ते में बाधा बन रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि खेलों को बढ़ावा देकर युवाओं को नशे जैसी बुराइयों से दूर रखा जा सकता है। यदि सरकार और स्थानीय प्रशासन इस ऐतिहासिक अखाड़े की ओर ध्यान दें, तो यह फिर से प्रदेश और देश को बेहतर खिलाड़ी दे सकता है।

महावीर अखाड़ा केवल एक प्रशिक्षण स्थल नहीं, बल्कि काशीपुर की खेल परंपरा का प्रतीक है। जरूरत है इसे आधुनिक सुविधाओं और उचित मार्गदर्शन से सशक्त बनाने की, ताकि यहां के पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन कर सकें।

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