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बड़ी खबर : गैरसैंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित, भाकपा माले ने किया विरोध

@शब्द दूत ब्यूरो 

भराड़ीसैंण। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर एक बड़ा दांव खेला है। 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने विधानसभा में बजट सत्र के दौरान घोषणा की कि देहरादून अब शीतकालीन राजधानी होगी। छह महीने के लिए गैरसैंण ग्रीष्मकालीन राजधानी होगी। मुख्यमंत्री ने लंबे समय से चली आ रही इस मांग को पूरा कर तमाम लोगों की मांग को पूरा किया है। हालांकि सरकार के इस फैसले को लेकर कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं की विपरीत प्रतिक्रिया भी आई है। 

भाकपा माले के गढ़वाल सचिव इन्द्रेश मैखुरी ने कहा कि यह घोषणा गैरसैंण के नाम पर गैरसैंण से छल है। ग्रीष्मकालीन-शीतकालीन का खेल गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की मांग को हाशिये पर डालने की त्रिवेंद्र रावत सरकार की साजिश है। 50 हजार करोड़ रुपये के कर्ज में डूबे हुए 13 जिलों के छोटे से प्रदेश में दो राजधानियां औचित्यहीन और जनता के धन की बर्बादी हैं। दो राजधानियां औपनिवेशिक अवधारणा है। जिसे हिंदुस्तान पर राज करने आये अंग्रेजों ने अपने ऐशोआराम के लिए ईजाद किया था। 

देश के जिन राज्यों में भी दो राजधानियां हैं, वहां का अनुभव बताता है कि दो राजधानियां भारी प्रशासनिक भ्रष्टाचार और जनता के लिए परेशानी का सबब बनी हैं। 
गैरसैंण के लिए संघर्षरत तमाम ताकतों को जनता को ठगने और लूटने के इस मॉडल को खारिज करना होगा और जनता के सपनों के उत्तराखंड और उसके अनुरूप राजधानी बनाने के संघर्ष में उतरना होगा। 

उत्तराखण्ड की राजधानी के तौर पर सबसे पहले वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने गैरसैंण का नाम सुझाया था। राज्य आंदोलन के दौरान भी गैरसैंण ही राजधानी के रूप में प्रस्तावित था। 

सन 1989 में डीडी पंत और विपिन त्रिपाठी ने गैरसैंण को उत्तराखंड की प्रस्तावित राजधानी के रूप में शामिल किया था। उत्तराखण्ड क्रान्ति दल ने तो सन् 1992 में गैरसैंण को उत्तराखण्ड की औपचारिक राजधानी तक घोषित कर दिया था। इसके बाद इस मुद्दे ने आंदोलन का रूप ले लिया।

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