@शब्द दूत ब्यूरो (14 जुलाई 2026)
नई दिल्ली/गुजरात। गुजरात के कच्छ जिले में स्थित प्राचीन नगर धौलावीरा से प्राप्त एक विशाल साइनबोर्ड आज भी दुनिया के पुरातत्वविदों और इतिहासकारों के लिए सबसे बड़े रहस्यों में से एक बना हुआ है। इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता (Indus-Saraswati Civilisation) का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात शिलालेख तथा दुनिया का सबसे प्राचीन ज्ञात साइनबोर्ड माना जाता है। हजारों वर्षों के अध्ययन के बावजूद इस पर अंकित लिपि को आज तक पूरी तरह पढ़ा या समझा नहीं जा सका है।
यह अद्वितीय साइनबोर्ड 10 बड़े चिन्हों (Signs) से बना है, जिन्हें जिप्सम (Gypsum) से तैयार किया गया था। प्रत्येक चिन्ह की ऊँचाई लगभग 36 सेंटीमीटर है, जबकि पूरे शिलालेख की लंबाई करीब 3 मीटर है। माना जाता है कि यह साइनबोर्ड किसी सार्वजनिक स्थान या नगर के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगाया गया होगा, ताकि दूर से भी इसे आसानी से देखा जा सके।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वर्ष 1989 से 2005 के बीच 13 चरणों में धौलावीरा की व्यापक खुदाई की। इस दौरान यहां से विकसित नगर नियोजन, विशाल जल संरक्षण प्रणाली, किलेबंदी, सड़कों और सार्वजनिक निर्माण से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण अवशेष मिले, जो इस प्राचीन सभ्यता की उन्नत तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता को दर्शाते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, धौलावीरा का यह साइनबोर्ड इस बात का प्रमाण है कि उस समय के लोग सार्वजनिक सूचना प्रदर्शित करने की परंपरा से परिचित थे। हालांकि, इस पर अंकित लिपि अब तक पढ़ी नहीं जा सकी है, इसलिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि इसमें किसी शासक का नाम, किसी स्थान का उल्लेख, धार्मिक संदेश या कोई अन्य सूचना दर्ज थी।
इतिहासकारों का मानना है कि यदि भविष्य में सिंधु लिपि को पढ़ने में सफलता मिलती है, तो यह साइनबोर्ड प्राचीन भारतीय इतिहास और सिंधु-सरस्वती सभ्यता के बारे में कई महत्वपूर्ण रहस्यों से पर्दा उठा सकता है।
धौलावीरा को वर्ष 2021 में यूनेस्को की विश्व धरोहर (World Heritage Site) सूची में भी शामिल किया गया था। यह स्थल आज न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया के शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लगभग 5,000 वर्ष पुराना यह रहस्यमयी साइनबोर्ड आज भी मानव सभ्यता के इतिहास की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेलियों में से एक माना जाता है।
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