@शब्द दूत ब्यूरो (22 अक्टूबर 2023)
काशीपुर। अठहत्तर कितना होता है? आज की पीढ़ी अक्सर ऐसे सवाल पूछती है। उसे बताना पड़ता है कि सेवन्टी एट होता है। राष्ट्रभाषा जिस देश की हिंदी हो उसके नौनिहालों को अंग्रेजी में समझाना पड़ता है। यह हमारे देश की सबसे बड़ी बिडम्बना है आजकल। इसी विषय को लेकर कुंडेश्वरी के ओरिसन स्कूल के छात्र छात्राओं ने एक लघु नाटिका के माध्यम से अभिनीत किया और हिंदी के महत्व को समझाया।
लघु नाटिका का शीर्षक हिंदी बीमार है, वास्तव में आज की हिंदी की दशा और दुर्दशा को इंगित करता है। नाटक में अभिनय कर रहे छात्र छात्राओं ने बड़े ही सहज ढंग से हिंदी के उत्थान के लिए प्रयास करने का संदेश दिया।बच्चों ने बताया कि अन्य भाषाओं के साथ-साथ हमें हिंदी भाषा को भी महत्व देना चाहिए।
स्कूल की प्रबंधिका श्रीमती उमा वात्सल्य ने बताया कि नुक्कड़ नाटक का उद्देश्य किसी समसामायिक प्रश्न अथवा समस्या के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा करना होता है। इसलिए नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से उनका ध्यान आकृष्ट करते हुए उन्हें सोचने के लिए मजबूर किया जाता है ताकि वे सुधार या बदलाव की जरूरत महसूस करें और उसके लिए प्रयास करें।
स्कूल के प्रधानाचार्य जगतार सिंह पन्नू ने संबोधित करते हुए कहा कि जैसे अंग्रेजी दुनिया को एक सूत्र में बांधती है, वैसे ही हमारे देश में हिंदी एक पुल है जो लोगों को जोड़ती है। मतलब जब दुनिया की सबसे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ हिंदी भाषा के महत्व और शक्ति को समझ सकती हैं, तो हम भारतीय इसकी सुंदरता और प्रासंगिकता को क्यों नहीं समझ सकते?
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