@शब्द दूत ब्यूरो (22 मार्च 2026)
उत्तराखण्ड की राजनीति में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने कार्यकाल के दौरान जिस तरह से मजबूत नेतृत्व, निर्णायक फैसलों और विकास की नई दिशा को स्थापित किया है, उसने उन्हें एक अलग पहचान दिलाई है। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा उन्हें “धाकड़”, “धर्मरक्षक” और “धुरंधर” जैसे विशेषणों से संबोधित किया जाना उनके कामकाज पर भरोसे और विश्वास की बड़ी मुहर माना जा रहा है। 26 साल के उत्तराखण्ड में जहां मुख्यमंत्री बदलने की परंपरा रही है, वहीं धामी ने स्थिरता और निरंतरता का नया अध्याय लिखा है।
चार वर्षों के कार्यकाल में राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक निर्णय लिए, जिनमें सबसे प्रमुख समान नागरिक संहिता लागू करना रहा, जिससे उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बन गया। इसके साथ ही सशक्त भू-कानून, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू कर कानून व्यवस्था को मजबूत किया गया। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 30 हजार से अधिक युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां मिलीं।
महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू किया गया और सहकारी समितियों में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया गया। मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना और स्वयं सहायता समूहों को बिना ब्याज ऋण जैसी योजनाओं से लाखों महिलाएं आत्मनिर्भर बनी हैं और “लखपति दीदी” अभियान ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती दी है।
सरकार ने राज्य आंदोलनकारियों और सैनिकों के सम्मान में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। आंदोलनकारियों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण और उनकी पेंशन में वृद्धि की गई, वहीं शहीद सैनिकों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को बढ़ाकर ₹50 लाख किया गया। अग्निवीरों को भी सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया गया है।
जनसेवा को प्रभावी बनाने के लिए “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के तहत सैकड़ों शिविर आयोजित किए गए, जिनमें लाखों लोगों को योजनाओं का लाभ मिला और हजारों शिकायतों का मौके पर समाधान किया गया। डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देते हुए “अपुणि सरकार पोर्टल” के माध्यम से सैकड़ों सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया है।
राज्य में निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व प्रगति हुई है। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के जरिए लाखों करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से बड़ी राशि धरातल पर उतर चुकी है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन, जमरानी बांध परियोजना और दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड रोड जैसी परियोजनाएं विकास को गति दे रही हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए किच्छा में एम्स सैटेलाइट सेंटर का निर्माण भी जारी है।
शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने, दून विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज की स्थापना और स्कूलों में श्रीमद्भगवद्गीता को पाठ्यक्रम में शामिल करने जैसे कदम उठाए गए हैं। पर्यटन के क्षेत्र में रिकॉर्ड संख्या में पर्यटक पहुंचे हैं और चारधाम यात्रा, कांवड़ यात्रा तथा रोपवे परियोजनाओं ने राज्य को प्रमुख धार्मिक और पर्यटन केंद्र बना दिया है।
ऊर्जा और खेल के क्षेत्र में भी राज्य ने नई उपलब्धियां हासिल की हैं। सौर ऊर्जा क्षमता में वृद्धि, हजारों सोलर रूफटॉप संयंत्रों की स्थापना और राष्ट्रीय खेलों में रिकॉर्ड पदक जीतना राज्य की प्रगति को दर्शाता है। विभिन्न राष्ट्रीय सूचकांकों में शीर्ष स्थान प्राप्त कर उत्तराखण्ड ने अपनी पहचान को और मजबूत किया है।
चार वर्षों में “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र के साथ आगे बढ़ते हुए धामी सरकार ने यह साबित किया है कि मजबूत नेतृत्व, पारदर्शी नीति और संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ किसी भी राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। “धाकड़, धर्मरक्षक और धुरंधर” अब केवल विशेषण नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड के बदलते स्वरूप की पहचान बन चुके हैं।
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