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गोविंदा को कभी दोस्त नहीं कह सकता… 14 साल बाद राम नाईक का छलका दर्द

@शब्द दूत ब्यूरो (29 मार्च 2024)

फिल्म अभिनेता गोविंदा के शिवसेना शिंदे ग्रुप में शामिल होने के बाद महाराष्ट्र की सियासत गरमा गई है. गोविंदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में शिवसेना में शामिल हो गए. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि गोविंदा मुंबई की नॉर्थ-वेस्ट सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. इस प्रकार गोविंदा ने करीब 14 साल के बाद एक बार फिर राजनीतिक पारी शुरू की है. 14 साल पहले गोविंदा ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और उन्होंने बीजेपी के कद्दावर नेता राम नाईक को हरा दिया था. महाराष्ट्र की राजनीति में यह एक बड़ी घटना थी.

अब गोविंदा का पाला बदल गया है. गोविंदा उस शिवसेना के शिंदे गुट के साथ हैं, जिसका प्रदेश की सरकार में बीजेपी के साथ गठबंधन है. गोविंदा के बारे में राम नाईक ने प्रतिक्रिया दी है. राम नाईक ने कहा कि मैं गोविंदा से परिचित हूं. लेकिन मैं उन्हें कभी अपना दोस्त नहीं कह पाऊंगा. उन्होंने मेरे खिलाफ चुनाव लड़ा था और मुझे हराया था. अब अगर उनकी उम्मीदवारी की घोषणा होती है तो मैं उनके बारे में बात नहीं करना चाहूंगा.

गोविंदा पर झूठ बोलने का आरोप लगाया

राम नाईक ने कहा है ऐसा लगता है गोविंदा झूठ बोलते हैं. उन्होंने कहा कि गोविंदा ने एक नहीं बल्कि दो-तीन बार कहा कि उन्होंने राजनीति छोड़ दी है. कभी राजनीति में नहीं आउंगा. लेकिन अब वो राजनीति में लौट आए हैं. इसी के साथ राम नाइक ने चुटकी लेते हुए कहा कि इसलिए मुझे लगता है कि गोविंदा झूठ भी बोल रहे हैं.

दाऊद से मदद वाले बयान पर कायम हूं

इसी के साथ उन्होंने ये भी वह अपने इस आरोप पर कायम हैं कि गोविंदा ने दाऊद की मदद ली थी. उन्होंने कहा कि गोविंदा ने मेरे आरोपों का खंडन नहीं किया. उन्हें चुनौती भी नहीं दी गई. इतने सालों में उनका कोई भी दोस्त आरोपों को खारिज करने के लिए आगे नहीं आया. मैंने अपनी किताब में इस आरोप का जिक्र किया है. किताब प्रकाशित हुए सात-आठ साल हो गए हैं. इतने सालों में उन्होंने कुछ नहीं कहा. इतने सालों में मैंने कभी ऐसा कुछ नहीं कहा कि मेरी बातों का कोई उल्टा मतलब निकाला जाए.

शिवसेना पर भी राम नाईक का निशाना

राम नाईक ने इसी के साथ शिवसेना पर निशाना साधा है. राम नाईक ने कहा कि शिवसेना अब पहले जैसी नहीं रही. उन्होंने ये भी कहा कि एनसीपी की मुंबई में कोई ताकत नहीं है. उन्हें जनता का समर्थन नहीं. मुंबई में उनका विधायक कभी नहीं चुना गया. यही स्थिति शिवसेना की भी है. एक बड़ा समूह शिवसेना छोड़ चुका है. इस दौरान उन्होंने इंडिया गठबंधन पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उनके बारे में बात न करना ही बेहतर है.

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