जानिए कौन हैं देवेंद्र यादव जिनके संग हरीश रावत ठान बैठे हैं रार

उत्तराखंड कांग्रेस के टॉप लीडर कहे जाने वाले हरीश रावत की देवेंद्र यादव से नाराजगी की वजह यह मानी जा रही है कि वह प्रचार अभियान में बहुत दखल दे रहे हैं। इसके अलावा टिकट बंटवारे में भी उनके समर्थकों को तवज्जो न दिए जाने का खतरा है।

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (24 दिसंबर, 2021)

उत्तराखंड में कांग्रेस के सीनियर नेता हरीश रावत ने पिछले दिनों नाराजगी जाहिर कर सूबे की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अपने ट्वीट्स में उन्होंने हाईकमान और उसके विश्वासपात्रों पर निशाना साधते हुए लिखा था कि जिनके आदेश पर हमें तैरना है, उनकी ही नुमाइंदे ही मेरे हाथ-पैर बांधने की कोशिश में जुटे हैं।

हरीश रावत ने अपने ट्वीट में खुलकर तो किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन माना जा रहा था कि उनकी इशारा प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी देवेंद्र यादव की ओर था। उत्तराखंड कांग्रेस के टॉप लीडर कहे जाने वाले हरीश रावत की देवेंद्र यादव से नाराजगी की वजह यह मानी जा रही है कि वह प्रचार अभियान में बहुत दखल दे रहे हैं। इसके अलावा टिकट बंटवारे में भी उनके समर्थकों को तवज्जो न दिए जाने का खतरा है।

दो बार विधायक रह चुके 49 वर्षीय देवेंद्र यादव दिल्ली के एक रईस परिवार से ताल्लुक रखते हैं। कारोबार और राजनीति दोनों में रुचि रखने वाले देवेंद्र यादव के पिता महेंद्र यादव भी कांग्रेस में रह चुके हैं। प्रधानजी के नाम से चर्चित रहे महेंद्र यादव के बेटे देवेंद्र यादव ने सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री ली है।

करीब 20 साल पहले जब रणदीप सिंह सुरजेवाला यूथ कांग्रेस के मुखिया थे, तब उन्होंने देवेंद्र यादव को संगठन में राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी थी। देवेंद्र यादव ने 2002 में पहली बार पार्षद का चुनाव दिल्ली की समयपुर बादली सीट से लड़ा था और जीते भी। इसके बाद 2007 में भी वह पार्षद चुने गए।

यही नहीं 2013 में जब कांग्रेस दिल्ली में बुरी तरह हारी, तब भी देवेंद्र यादव उन आठ विधायकों में से एक थे, जो जीतकर आए थे। हालांकि 2014 में अरविंद केजरीवाल के एक बार फिर से इस्तीफा दिए जाने के बाद चुनाव हुआ था और इस बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके कांग्रेस में उनका कद लगातार बढ़ता रहा और 2017 में पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय सचिव बना दिया। उन्हें अविनाश पांडे के साथ लगाया गया, जो राजस्थान के प्रभारी महासचिव थे। राजस्थान में चुनाव अभियान संभालने वाली कांग्रेस की टीम का वह हिस्सा थे।

इसके बाद 2019 में उन्हें कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। हालांकि उनकी लीडरशिप में पार्टी की बुरी स्थिति हुई और सभी लोकसभा सीटों पर कांग्रेस को बुरी हार झेलनी पड़ी। इसके बाद भी उनकी स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा और उन्हें कांग्रेस ने उत्तराखंड का प्रभारी नियुक्त कर दिया।

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