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बॉलीवुड अभिनेता हेमंत पांडे से बेबाक बातचीत :क्या राजनीति में आयेंगे? क्यों हुई रुचि सियासत में?क्यों कहा अखबार की खबर “मां कसम” के बराबर होती थी कभी

@विनोद भगत

बॉलीवुड अभिनेता हेमंत पांडे राजनीति में आ रहे हैं लेकिन अपने भीतर के कलाकार और इंसानियत को कायम रखेंगे। कौन से दल से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करेंगे यह उन्होंने अभी तय नहीं किया है।

उत्तराखंड के पिथौरागढ के मूल निवासी और बॉलीवुड में कई फिल्मों के साथ साथ टीवी सीरियलों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके हेमंत पांडे कुछ दिन पूर्व खुद के राजनीत में आने को नकारा था। शब्द दूत न्यूज पोर्टल के संपादक से हुई बेबाक बातचीत में हेमंत पांडे ने बताया कि उनकी राजनीति में एकाएक रुचि क्यों हुई?

हेमंत पांडे बताते हैं कि पिछले दिनों वह मध्य प्रदेश में चल रहे उपचुनाव के सिलसिले में रोड शो कर रहे थे।  केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ रोड शो में उनके साथ अभिनेता राजपाल यादव भी थे। काफी समय उन्होंने कृषि मंत्री तोमर के साथ बिताया। इस दौरान जब उन्होंने नरेंद्र सिंह तोमर के प्रति लोगों का जो स्नेह और समर्पण देखा। हेमंत पांडे कहते हैं कि उन्हें पहली बार किसी राजनेता का स्टारडम देखा। इससे राजनीति के प्रति तो नहीं पर राजनेता के प्रति उनका नजरिया में बदलाव हो रहा है। 

हालांकि हेमंत पांडे साफ कहते हैं कि राजनीति में आपको अपने व्यक्तित्व के विपरीत व्यवहार करना पड़ता है और राजनीति में कई लोग गलत है। पर नरेंद्र सिंह तोमर जैसे राजनेताओं ने राजनीति के भीतर शुचिता को कायम रखा है। ऐसे लोगों की वजह से उनकी राजनीति में रुचि बढ़ रही है। हेमंत कहते हैं कि उन्होंने अभी राजनीत में आने का तय नहीं किया है। लेकिन अगर वह राजनीति में आये तो बगैर किसी पद के आयेंगे। पार्टी के लिए वह निष्ठा के साथ काम करेंगे। पद न लेने के पीछे हेमंत पांडे अपनी सोच यह बताते हैं कि पद का मतलब होता है कि राजनीति में आप लालच की वजह से आये हैं। ऐसे में राजनीत में आने का उद्देश्य पवित्र न होकर स्वार्थी हो जाता है। 

हेमंत पांडे कहते हैं कि राजनेता के तौर पर पर वह देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रशंसक हैं। एक कलाकार के तौर पर उन्होंने अपने जीवन में यही कमाया है कि प्रधानमंत्री मोदी उन्हें व्यक्तिगत तौर पर पांडे जी के नाम से जानते हैं। हेमंत पांडे ने कहा कि कोई काम कठिन नहीं होता अगर आप अपने व्यक्तित्व को सरल व सज्जन बना लें।

राजनीत में रुचि के बावजूद हेमंत पांडे ने दोहराया कि राजनीत में आने का मतलब आपको अपने आलाकमान बनाना पड़ेगा और वह अपना आलाकमान किसी को नहीं बनाना चाहते हैं। 

बॉलीवुड अभिनेता हेमंत पांडे ने बताया कि वह भी पत्रकार रहे हैं। हल्द्वानी से प्रकाशित दैनिक अखबार का जिक्र करते हुए हेमंत पांडे ने कहा कि तब खबरे चिट्ठी के द्वारा बसों से भेजी जाती थी और तीसरे दिन खबर छ्प के आती थी। तब के दौर को याद करते हुए हेमंत पांडे कहा कि उस समय अखबार में छपी खबर मां कसम के बराबर होती थी। पर आज व्यवसायिक दौर की पत्रकारिता में वह बात नहीं रही। 

एक घटना का जिक्र करते हुए हेमंत पांडे ने कहा कि देहरादून में फिल्म विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष (राज्य मंत्री) रहने के दौरान एक पत्रकार ने उनका एक घंटे का साक्षात्कार लिया लेकिन एक भी वह बात प्रकाशित नहीं की जो साक्षात्कार में उन्होंने कहा। दरअसल वह पत्रकार किसी के कहने पर मुझसे कुछ भेद उगलवाने आया था। पर हमारे पास कोई भेद ही नहीं था। हेमंत पांडे कहते हैं कि ऐसी पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों ने मीडिया का स्वरूप बिगाड़ दिया है। पर सभी पत्रकारों को इस श्रेणी में नहीं रख सकते।

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