@शब्द दूत ब्यूरो (14 अक्टूबर 2026)
आमंत्रित करने के बाद कवरेज के दौरान धक्कामुक्की और रोकटोक पर उठ रहे सवाल, पास व्यवस्था समाप्त होने से बढ़ी असमंजस की स्थिति
वीआईपी कार्यक्रमों में मीडिया कर्मियों के साथ सुरक्षा के नाम पर कथित तौर पर अपमानजनक व्यवहार किए जाने की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। विडंबना यह है कि जिन पत्रकारों और मीडिया कर्मियों को कार्यक्रम की कवरेज के लिए बाकायदा फोन या व्हाट्सऐप के माध्यम से आमंत्रित किया जाता है, कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद उन्हें ही कई बार असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। कवरेज के दौरान धक्कामुक्की, अनावश्यक रोकटोक और अपमानजनक व्यवहार की शिकायतें मीडिया जगत में एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करती हैं कि आखिर आमंत्रित मीडिया कर्मियों के साथ इस तरह का व्यवहार कब तक होता रहेगा?
वीआईपी कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था का अपना महत्व है। किसी भी विशिष्ट व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है। लेकिन सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और मीडिया कर्मियों के सम्मान को ठेस पहुंचाने के बीच स्पष्ट अंतर होना चाहिए। सुरक्षा के नाम पर पत्रकारों को अपमानित करना या उनके साथ ऐसा व्यवहार करना, जिससे उनकी गरिमा प्रभावित हो, किसी भी स्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
आमंत्रण के बाद भी कवरेज में बाधाएं
आमतौर पर वीआईपी कार्यक्रमों में मीडिया की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभाग, आयोजन समिति या सूचना विभाग की ओर से पत्रकारों को आमंत्रित किया जाता है। कई बार यह आमंत्रण फोन कॉल या व्हाट्सऐप संदेश के माध्यम से दिया जाता है। इसके बाद पत्रकार अपने समाचार पोर्टल, समाचार पत्र, टेलीविजन चैनल या अन्य माध्यमों के लिए समाचार संकलन करने के उद्देश्य से कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते हैं।
लेकिन वास्तविक समस्या उस समय पैदा होती है, जब कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने के बाद मीडिया कर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर अलग-अलग तरह की रोकटोक का सामना करना पड़ता है। कई बार उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया जाता है, तो कभी कवरेज के लिए निर्धारित स्थान तक पहुंचने में परेशानी होती है। कुछ परिस्थितियों में सुरक्षाकर्मियों का व्यवहार भी असहज और अपमानजनक महसूस होता है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि मीडिया कर्मियों को कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया है, तो उनके प्रवेश, बैठने और कवरेज की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित क्यों नहीं की जाती? आमंत्रण देने वाले विभाग और सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आखिर पत्रकारों को क्यों भुगतना पड़े?
सुरक्षा के नाम पर मीडिया ही संदेह के घेरे में क्यों?
वीआईपी कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था के दौरान कई बार ऐसा माहौल दिखाई देता है, जिसमें मीडिया कर्मियों को भी संदेह की नजर से देखा जाने लगता है। कैमरा, माइक और अन्य उपकरण लेकर कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों को लेकर सुरक्षाकर्मियों की अतिरिक्त सतर्कता समझी जा सकती है, लेकिन यह सतर्कता सम्मानजनक व्यवहार की सीमा में रहनी चाहिए।
पत्रकारों का काम कार्यक्रम की गतिविधियों को जनता तक पहुंचाना, महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाना और जनहित से जुड़े विषयों को सामने लाना है। वे किसी कार्यक्रम में अनधिकृत प्रवेश करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि समाचार संकलन के लिए पहुंचते हैं। यदि सुरक्षा कारणों से किसी क्षेत्र में प्रवेश प्रतिबंधित है, तो इसकी जानकारी स्पष्ट रूप से दी जानी चाहिए। मीडिया कर्मियों के लिए निर्धारित स्थान और कवरेज के नियम पहले से तय होने चाहिए, ताकि मौके पर अनावश्यक विवाद की स्थिति पैदा न हो।
सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य किसी संभावित खतरे को रोकना है, न कि आमंत्रित पत्रकारों को अपमानित करना। यही संतुलन किसी भी सुव्यवस्थित कार्यक्रम की पहचान होना चाहिए।
सूचना विभाग की पास व्यवस्था क्यों हुई कमजोर?
पहले कई वीआईपी कार्यक्रमों में सूचना विभाग के माध्यम से मीडिया कर्मियों को पास जारी किए जाने की परंपरा रही है। इस व्यवस्था से कार्यक्रम स्थल पर मीडिया की पहचान करने और प्रवेश को व्यवस्थित रखने में सहायता मिलती थी। पास के आधार पर सुरक्षाकर्मियों को भी यह स्पष्ट रहता था कि कौन-कौन से मीडिया प्रतिनिधि अधिकृत रूप से कवरेज के लिए पहुंचे हैं।
हालांकि, पिछले कुछ समय से कई कार्यक्रमों में इस व्यवस्था के कमजोर पड़ने या उसका नियमित रूप से पालन नहीं होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। इसके स्थान पर केवल फोन या व्हाट्सऐप के माध्यम से आमंत्रण देने की व्यवस्था अपनाए जाने से कई बार भ्रम की स्थिति बन जाती है।
जब प्रवेश के लिए कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं होती, तो कार्यक्रम स्थल पर तैनात सुरक्षाकर्मी अपने स्तर पर निर्णय लेते हैं। दूसरी ओर, पत्रकारों को यह समझने में कठिनाई होती है कि उन्हें कहां तक जाने की अनुमति है और किस स्थान से कवरेज करनी है। परिणामस्वरूप, आमंत्रित होने के बावजूद उन्हें प्रवेश या कवरेज के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
यह आवश्यक है कि संबंधित विभाग इस व्यवस्था की समीक्षा करें और कार्यक्रम की प्रकृति के अनुरूप स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करें। यदि पास व्यवस्था लागू नहीं है, तो मीडिया की पहचान और प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए कोई वैकल्पिक, व्यवस्थित प्रक्रिया जरूर होनी चाहिए।
वरिष्ठ मीडिया कर्मियों का कार्यक्रमों से दूरी बनाना चिंता का विषय
मीडिया जगत के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है कि अपमानजनक व्यवहार से आहत होकर कुछ वरिष्ठ मीडिया कर्मियों ने वीआईपी कार्यक्रमों में जाना कम कर दिया है या ऐसे आयोजनों से दूरी बना ली है। वरिष्ठ पत्रकारों के अनुभव और उनकी उपस्थिति किसी भी समाचार व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है।
जब लंबे समय से पत्रकारिता कर रहे लोगों को भी कार्यक्रमों में सम्मानजनक व्यवहार और व्यवस्थित कवरेज के लिए संघर्ष करना पड़े, तो यह केवल व्यक्तिगत असुविधा का विषय नहीं रह जाता। यह संस्थागत समन्वय, मीडिया के प्रति दृष्टिकोण और सार्वजनिक आयोजनों की कार्यप्रणाली से जुड़ा प्रश्न बन जाता है।
हालांकि, किसी कार्यक्रम में शामिल होना या न होना प्रत्येक मीडिया संस्थान और पत्रकार का अपना निर्णय है, लेकिन परिस्थितियां ऐसी नहीं होनी चाहिए कि पत्रकारों को अपमान से बचने के लिए कार्यक्रमों से दूरी बनाना ही बेहतर विकल्प लगे।
मीडिया की चुप्पी से समस्या का समाधान कैसे होगा?
इस पूरे विषय का एक महत्वपूर्ण पहलू मीडिया कर्मियों की आपसी चुप्पी भी है। कई बार पत्रकार कार्यक्रम स्थल पर अपमानजनक व्यवहार का सामना करने के बावजूद इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से उठाने से बचते हैं। इसके पीछे अलग-अलग कारण हो सकते हैं। किसी को भविष्य में मिलने वाले आमंत्रणों की चिंता होती है, तो किसी को लगता है कि विरोध करने से कोई बदलाव नहीं आएगा।
लेकिन यदि इस समस्या को बार-बार नजरअंदाज किया जाता है, तो इसकी पुनरावृत्ति की आशंका बनी रहती है। मीडिया संगठनों, प्रेस क्लबों, पत्रकार यूनियनों और समाचार संस्थानों को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
व्यक्तिगत विवाद बनाने के बजाय इस मुद्दे को पत्रकारों की गरिमा, कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार और समाचार संकलन की व्यावहारिक जरूरतों से जोड़कर उठाया जाना चाहिए। किसी भी शिकायत पर तथ्यों के आधार पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा सकता है और भविष्य के कार्यक्रमों के लिए ठोस व्यवस्था की मांग की जा सकती है।
समाधान के लिए जरूरी हैं स्पष्ट नियम और बेहतर समन्वय
इस समस्या का समाधान केवल शिकायत करने से नहीं, बल्कि व्यवस्था में सुधार लाने से संभव है। इसके लिए कुछ बुनियादी कदम उठाए जाने चाहिए।
सबसे पहले, वीआईपी कार्यक्रमों में मीडिया कर्मियों को आमंत्रित करने वाली एजेंसी को प्रवेश की प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए। कार्यक्रम के समय, स्थान, प्रवेश द्वार, कवरेज क्षेत्र और आवश्यक पहचान संबंधी जानकारी पहले ही उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
दूसरा, सूचना विभाग, आयोजन समिति और सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाना चाहिए। कार्यक्रम स्थल पर मीडिया समन्वय के लिए एक जिम्मेदार अधिकारी या संपर्क व्यक्ति नियुक्त किया जा सकता है, जिससे पत्रकारों को किसी समस्या के समय उचित मार्गदर्शन मिल सके।
तीसरा, सुरक्षाकर्मियों को यह स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए कि अधिकृत मीडिया कर्मियों की पहचान कैसे की जाएगी और उन्हें किन क्षेत्रों में कवरेज की अनुमति होगी। यदि सुरक्षा कारणों से किसी क्षेत्र में प्रवेश वर्जित है, तो पत्रकारों को सम्मानपूर्वक इसकी जानकारी दी जानी चाहिए।
चौथा, मीडिया संगठनों को भी अपने स्तर पर पत्रकारों के लिए पहचान पत्र, आमंत्रण संदेश और आवश्यक दस्तावेज साथ रखने जैसी व्यवस्थाओं को प्रोत्साहित करना चाहिए। किसी नियम के उल्लंघन या सुरक्षा संबंधी समस्या की स्थिति में विवाद बढ़ाने के बजाय संवाद और निर्धारित प्रक्रिया से समाधान तलाशा जाना चाहिए।
पत्रकारों का सम्मान और सुरक्षा, दोनों जरूरी
लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया की भूमिका महत्वपूर्ण है। पत्रकार जनता तक सूचनाएं पहुंचाने, प्रशासनिक गतिविधियों पर नजर रखने और जनहित से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का काम करते हैं। इसलिए सार्वजनिक कार्यक्रमों में मीडिया कर्मियों के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें सुरक्षा से कोई समझौता किए बिना उनके काम को सुचारु रूप से पूरा करने का अवसर मिले।
यह भी उतना ही जरूरी है कि मीडिया कर्मी सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करें और प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने का प्रयास न करें। सम्मान और जिम्मेदारी दोनों पक्षों से अपेक्षित हैं। लेकिन नियमों का पालन सुनिश्चित करने का तरीका भी मर्यादित और पेशेवर होना चाहिए।
वीआईपी कार्यक्रमों में मीडिया को बुलाना केवल औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। आमंत्रण देने के साथ-साथ पत्रकारों को कवरेज के लिए आवश्यक सुविधाएं, स्पष्ट दिशा-निर्देश और सम्मानजनक व्यवहार उपलब्ध कराना भी संबंधित आयोजकों की जिम्मेदारी है।
अब समय आ गया है कि संबंधित विभाग, प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियां और मीडिया संगठन इस विषय पर गंभीरता से विचार करें। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए, लेकिन उसके नाम पर पत्रकारों की गरिमा से समझौता नहीं होना चाहिए। आखिरकार, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सुरक्षा और सम्मान एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित और जिम्मेदार व्यवस्था के दो महत्वपूर्ण आधार हैं।
किसी एक विशेष कार्यक्रम की बात नहीं लगभग सभी वीआईपी कार्यक्रमों में ये होना आम बात है।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal



