@शब्द दूत ब्यूरो (10 फरवरी 2026)
देहरादून/मसूरी। मसूरी के जंगल क्षेत्र में स्थित बुल्लेशाह के नाम से बताई जा रही मजार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आरोप है कि जिस सूफी कवि बुल्लेशाह का मकबरा पाकिस्तान के कसूर शहर में स्थित है, उनके नाम पर मसूरी में अवैध मजार खड़ी कर उर्स के बहाने लाखों रुपये की चंदा वसूली की जा रही है, जबकि मजार प्रबंध समिति आज तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई कि बुल्लेशाह पाकिस्तान से मसूरी कैसे पहुंचे। बताया जा रहा है कि मजार के खादिमों ने स्थानीय हिंदुओं को आगे कर एक समिति बना रखी है, जो चंदे का हिसाब-किताब सार्वजनिक नहीं करती।
स्थानीय संगठनों का कहना है कि जिस परिसर में यह कथित मजार है, वह एक ईसाई स्कूल का क्षेत्र बताया जा रहा है और यहां बुल्लेशाह के नाम के साथ-साथ कई अन्य अवैध मजारे भी बना दी गई हैं, जिनके बारे में समिति ने कोई जानकारी नहीं दी। हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों का आरोप है कि यह सब समाज को गुमराह करने का प्रयास है और समिति व खादिम ‘कालनेमि’ की भूमिका निभा रहे हैं।
इतिहासकारों और जानकारों के अनुसार बुल्लेशाह एक ही सूफी फकीर और रहस्यवादी कवि थे, जिनका जन्म-पलन पंजाब क्षेत्र में हुआ और जिनका मकबरा आज भी पाकिस्तान के कसूर शहर के मध्य स्थित है। उनके गुरु लाहौर के सूफी मुर्शिद शाह इनायत कादिरी बताए जाते हैं। बुल्लेशाह की सूफियाना रचनाएं आज भी भारत-पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में गाई जाती हैं, जिनमें प्रेम को सर्वोपरि बताया गया है। ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि जब उनकी मजार कसूर में है, तो मसूरी में उनके नाम की मजार कैसे बनी।
आरोप है कि मजार परिसर में बैठे कुछ खादिम अगरबत्ती, चादर, ताबीज, झाड़-फूंक और प्रसाद के नाम पर स्थानीय लोगों को गुमराह कर रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यहां मुस्लिम समुदाय के लोग कम जाते हैं। हाल ही में कुछ हिंदुत्वनिष्ठ संगठनों के कार्यकर्ताओं द्वारा मजार को तोड़े जाने के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी, जिसके चलते प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था बढ़ानी पड़ी।
मामले में यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कथित मजार समिति में भाजपा से जुड़े लोग शामिल हैं, जिन पर संगठनों की नजर बनी हुई है। जिला प्रशासन का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि संबंधित धार्मिक संरचनाएं कैसे बनीं और उनकी वैधता क्या है।
विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के नेताओं का कहना है कि ये अवैध मजारे हैं और आस्था के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है। विहिप के मीडिया प्रभारी पंकज चौहान ने दावा किया कि बुल्लेशाह पाकिस्तान में दफन हैं, इसलिए मसूरी में उनके नाम पर बनी मजार फर्जी है और प्रशासन को इन्हें हटाकर देवभूमि की संस्कृति का संरक्षण करना चाहिए।
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