@शब्द दूत ब्यूरो (09 फरवरी 2026)
काशीपुर। देश और प्रदेश में विकास के दावे तेज़ी से किए जा रहे हैं। सरकारें और अधिकारी बार-बार यह कहते नहीं थकते कि विकास का पहिया पूरी रफ्तार से दौड़ रहा है, लेकिन काशीपुर में रामनगर रोड पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर इन दावों की हकीकत बयां करता नज़र आता है। यहां विकास का पहिया मानो थम सा गया है। इस वक्त रामनगर रोड पर मौजूद यह फ्लाईओवर न तो पूरी तरह बन पाया है और न ही इसके पूरा होने की कोई तय समय-सीमा सामने आ रही है।
स्थिति यह है कि काशीपुर की ओर से आने वाला हिस्सा हो या रामनगर रोड की तरफ से आने वाला भाग, दोनों ओर से फ्लाईओवर लगभग तैयार दिखाई देता है। सड़कें बन चुकी हैं, ढांचा खड़ा है, सर्विस रोड भी काफी हद तक तैयार है, लेकिन रेलवे लाइन के ऊपर से गुजरने वाला छोटा सा हिस्सा बीते कई वर्षों से अधूरा पड़ा है। यही छोटा सा हिस्सा पूरे फ्लाईओवर को अधूरा बनाए हुए है और शहर के लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
कई बार डीपीआर बनने की बातें हुईं, योजनाएं बनीं और दावे किए गए, लेकिन ज़मीन पर नतीजा आज भी वही है—अधूरा फ्लाईओवर। जब इस देरी पर सवाल उठते हैं तो जिम्मेदारी तय करने के बजाय एक-दूसरे पर दोषारोपण शुरू हो जाता है। कोई रेलवे का हवाला देता है तो कोई विभागीय प्रक्रियाओं का, लेकिन सच्चाई यह है कि वर्षों से यह ढांचा यूं ही खड़ा है।
लगभग सात से आठ साल का वक्त बीत चुका है, लेकिन अब तक यह फ्लाईओवर पूरा नहीं हो सका। अगर वाकई विकास इतनी तेजी से हो रहा होता, तो यह परियोजना कब की पूरी हो चुकी होती। फ्लाईओवर के अधूरे रहने से आसपास के दुकानदारों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है और शहरवासियों के लिए यह रोज़मर्रा की बड़ी समस्या बन चुका है। कई लोग इसे विकास की बजाय एक अभिशाप तक कहने लगे हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह भी है कि जिस लागत पर इस फ्लाईओवर का निर्माण शुरू हुआ था, देरी के चलते उसकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में सरकारी राजस्व को करोड़ों के नुकसान की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। निर्माण पूरा होने के बाद भले ही श्रेय लेने के लिए नेता और अधिकारी सामने आ जाएं, लेकिन वर्षों से जनता जो दर्द और परेशानी झेल रही है, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
कुल मिलाकर रामनगर रोड का यह फ्लाईओवर काशीपुर में विकास की असल तस्वीर पेश करता है, जहां काम लगभग पूरा होने के बावजूद एक छोटा सा हिस्सा पूरे प्रोजेक्ट को सालों से रोककर बैठा है। यह फ्लाईओवर आज काशीपुर में कछुआ चाल से चल रहे विकास का प्रतीक बन चुका है, जिसकी कोई स्पष्ट समय-सीमा अब तक तय नहीं हो पाई है।
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