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काशीपुर :एक वर्ष—सेवा, संकल्प और परिणाम एक साल में बदला काशीपुर का चेहरा: विकास के दावों से आगे बढ़कर धरातल पर उतरे काम, दीपक बाली ने राजनेता की बदल दी परिभाषा

@शब्द दूत ब्यूरो (07 फरवरी 2026)

काशीपुर नगर निगम के इतिहास में 7 फरवरी 2025 से 7 फरवरी 2026 का एक वर्ष महज एक कार्यकाल नहीं, बल्कि एक परिवर्तन काल के रूप में दर्ज होता दिखाई देता है। महापौर दीपक बाली के नेतृत्व में नगर निगम ने जिस तरह से विकास, स्वच्छता, नागरिक सुविधाओं और वित्तीय अनुशासन को एक साथ साधा है, वह स्थानीय निकायों के लिए एक उदाहरण बनता जा रहा है। आमतौर पर राजनेता भाषणों और दावों तक सीमित रहते हैं पर दीपक बाली ने राजनेता की छवि को ही बदल दिया है।

नगर निगम सभागार में आयोजित एक वर्ष पूर्णता कार्यक्रम में महापौर दीपक बाली द्वारा प्रस्तुत उपलब्धियों का लेखा-जोखा केवल आंकड़ों का संकलन नहीं था, बल्कि यह उस प्रशासनिक इच्छाशक्ति का प्रतिबिंब था, जिसने काशीपुर को विकास की नई दिशा दी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और सहयोग को केंद्र में रखते हुए महापौर ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार और स्थानीय निकाय के बीच बेहतर समन्वय ने ही इस प्रगति को संभव बनाया।

एक वर्ष में 792 सड़कों का निर्माण और 121 करोड़ रुपये के विकास कार्य अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि ये कार्य शहर के विभिन्न वार्डों में संतुलित रूप से पहुंचे। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 1139 परिवारों को आवास मिलना सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस कदम माना जा सकता है। पीएमएवाई शहरी 2.0 में आवेदनों में 78 प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि योजनाओं के प्रति आमजन का भरोसा बढ़ा है।

महापौर बाली के कार्यकाल की विशेषता यह रही कि विकास को केवल सड़क और भवन तक सीमित नहीं रखा गया। हाई-टेक शौचालय, पिंक टॉयलेट, 5000 नई स्ट्रीट लाइट और नए बस स्टॉप जैसी सुविधाएं शहर के दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं। पीएम स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी वालों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास आर्थिक समावेशन की दिशा में सराहनीय कदम है।

नगर निगम द्वारा संचालित आरोग्य केंद्रों से हजारों नागरिकों को लाभ मिलना शहरी स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करता है। एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर के माध्यम से निराश्रित पशुओं की देखभाल एक संवेदनशील प्रशासन का संकेत देती है।
स्वच्छता के क्षेत्र में 40 हजार मीट्रिक टन पुराने कचरे का निस्तारण, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का पूर्ण संचालन और AI आधारित ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली काशीपुर को आधुनिक शहरों की कतार में खड़ा करती है। रात तीन बजे तक सफाई होने वाला देश का दूसरा शहर बनना महज उपलब्धि नहीं, बल्कि कार्यसंस्कृति में बदलाव का प्रमाण है।

विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह रहा कि टैक्स का अतिरिक्त भार डाले बिना नगर निगम की आय में वृद्धि की गई। CSR के माध्यम से एक करोड़ रुपये से अधिक की भागीदारी यह बताती है कि औद्योगिक इकाइयों का विश्वास नगर निगम के कामकाज पर बढ़ा है। प्रस्तावित परियोजनाएं—गिरिताल झील, वेंडिंग जोन, हाई-टेक मार्केट, ई-व्हीकल चार्जिंग स्टेशन—काशीपुर को भविष्य के स्मार्ट शहर की ओर ले जाती दिखती हैं।

कार्यक्रम में विधायक, भाजपा संगठन, पार्षदों और अधिकारियों की एकजुट उपस्थिति यह दर्शाती है कि नगर निगम का कामकाज राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर शहर हित में केंद्रित रहा। दिवंगत पार्षद को श्रद्धांजलि और पर्यावरण मित्रों के सम्मान ने मानवीय संवेदना को भी मंच दिया।

एक वर्ष का यह कार्यकाल यह संकेत देता है कि यदि नेतृत्व स्पष्ट हो, प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो और जनता की सहभागिता साथ हो, तो शहरी विकास केवल घोषणा नहीं, वास्तविकता बन सकता है। महापौर दीपक बाली का यह पहला वर्ष अपेक्षाओं पर खरा उतरता दिखता है। अब चुनौती यह है कि यह गति बनी रहे और योजनाएं समयबद्ध व गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरी हों।

काशीपुर ने एक साल में जो बदला हुआ चेहरा देखा है, वह आने वाले वर्षों के लिए उम्मीद जगाता है—कि यह शहर केवल उत्तराखंड का ही नहीं, बल्कि देश के बेहतर शहरी मॉडल्स में अपनी जगह बना सके।

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