@शब्द दूत ब्यूरो (26 अगस्त 2025)
विकासनगर (देहरादून)। उत्तराखंड में मदरसों को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। मार्च 2025 में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर प्रशासन ने प्रदेशभर में अवैध रूप से संचालित मदरसों पर बड़ी कार्रवाई की थी। उस दौरान कई मदरसों को दस्तावेज़ों की खामियों और नियमों के उल्लंघन के चलते सील कर दिया गया था। बाद में सुधार और आवश्यक दस्तावेज पूरे करने के बाद कुछ संस्थानों को कोर्ट के आदेश पर दोबारा खोला गया। इन्हीं में खुशहालपुर स्थित जामिया हसनैन बीन अली मदरसा भी शामिल था।
अब इस मदरसे को लेकर फिर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय हिंदू संगठनों का आरोप है कि कोर्ट में पेश किए गए दस्तावेज़ फर्जी हैं और अदालत को गुमराह किया गया है। संगठनों का कहना है कि जिस व्यक्ति के नाम से एफिडेविट प्रस्तुत किया गया, उसकी मृत्यु 2023 में ही हो चुकी थी। मृतक के नाम पर दस्तावेज़ दाखिल करना कानूनी दृष्टि से गंभीर सवाल खड़े करता है।
मदरसे की जमीन को लेकर भी विवाद है। जानकारी के अनुसार यह मदरसा ग्राम समाज की भूमि पर संचालित है, जबकि दस्तावेज़ों में अलग खसरा नंबर और जमीन का विवरण दर्ज किया गया है। इसे लेकर स्थानीय समुदाय और हिंदू संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और प्रशासन को इस मामले में सख्त कदम उठाने चाहिए।
इस पूरे विवाद पर अल्पसंख्यक सचिव ने कहा है कि मामले की जानकारी मिल चुकी है और जांच करवाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसों की सील खोलने का विषय अलग है, लेकिन मान्यता तभी दी जाएगी जब संस्थान पंजीकरण संबंधी नियमों का पालन करेंगे।
स्थानीय संगठनों की मांग है कि जिला प्रशासन तुरंत मामले की जांच करे और यदि नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।
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