@विनोद भगत
नैनीताल जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव विवाद के बीच धामी सरकार ने संतुलित रुख अपनाते हुए प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर सख्त कदम उठाए हैं। चुनाव प्रक्रिया के दौरान पांच जिला पंचायत सदस्यों के कथित अपहरण के आरोप सामने आने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई थी। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए, जिससे मामला तूल पकड़ गया। भाजपा प्रत्याशी की तहरीर पर जहां विपक्षी नेताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ, वहीं कांग्रेस की शिकायतों पर भी सरकार ने संज्ञान लेते हुए जांच बैठा दी।
इसी बीच लापता बताए जा रहे सदस्य सामने आकर वीडियो बयान जारी कर चुके हैं, जिसमें उन्होंने अपहरण से इनकार किया है। सरकार ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी कहते हैं कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा से कोई समझौता नहीं होगा और दोषी चाहे किसी भी दल का हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन को कड़ी निगरानी रखने और कानून-व्यवस्था को दुरुस्त बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। धामी सरकार की इस संतुलित कार्यवाही को राजनीतिक टकराव को शांत करने और जनता का विश्वास बनाए रखने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
वहीं निर्वाचन आयोग ने भी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई और विभागीय जांच बैठाकर राज्य सरकार के इरादों को स्पष्ट कर दिया है। अब जांच होगी और मामले का खुलासा हो जायेगा।
बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही एक-दूसरे पर जिला पंचायत सदस्यों को किडनैप करने का आरोप गया था।वहीं इस मामले में अब नया अपडेट ये आया है कि पुलिस ने भाजपा जिलाध्यक्ष समेत 11 नामजद व 15-20 अज्ञात लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है। उधर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर धामी सरकार की नीति साफ नजर आ रही है। किसी भी मामले में पक्षपात का रवैया नहीं अपनाया जा रहा है।
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