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लोमहर्षक वारदात :डायन के शक में एक ही परिवार के 5 लोगों पहले पीटा फिर जिंदा जला दिया, गांव में पसरा सन्नाटा, गाँव के अधिकांश लोग फरार

बताया जा रहा है कि गांव के कुछ लोगों ने महिला पर “डायन” होने का आरोप लगाया और इसी अंधविश्वास के चलते उन्होंने पूरे परिवार को निशाना बना डाला। पहले पूरे परिवार की बेरहमी से पिटाई की गई और फिर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। चीख-पुकार के बीच कोई उन्हें बचाने नहीं आया।

@शब्द दूत ब्यूरो (07 जुलाई 2025)

पूर्णिया जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां डायन के शक में एक ही परिवार के पांच लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और फिर उन्हें जिंदा जला दिया गया। यह वीभत्स वारदात जिले के धमदाहा थाना क्षेत्र अंतर्गत एक गांव में घटी, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया है। घटना के बाद गांव के अधिकतर लोग फरार हो गए हैं, जिससे पुलिस की जांच में भी बाधा उत्पन्न हो रही है।

बताया जाता है कि गांव के ही रामदेव उरांव के बेटे की झाड़-फूंक के दौरान मौत हो गई थी और दूसरे बेटे की तबीयत बिगड़ रही थी. इसी के बाद गांव वालों ने मौत की वजह डायन को मानते हुए एक परिवार को निशाना बनाया। आरोप है कि बाबूलाल उरांव, सीता देवी, मनजीत उरांव, रनिया देवी और तपतो मोसमत को गांव के लोगों ने पहले बुरी तरह पीटा और फिर उन्हें जिंदा जलाकर मार डाला. सभी मृतक एक ही परिवार से हैं. घटना के बाद गांव में भय का माहौल है और कई लोग अपने घर छोड़कर चले गए हैं. पुलिस मौके पर पहुंच चुकी है और डॉग स्क्वायड व एफएसएल टीम के साथ जांच कर रही है.पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी नकुल कुमार को गिरफ्तार किया है, जिस पर जिंदा जलाने के लिए भीड़ को उकसाने का आरोप है. घटना में बचकर निकले मृतक के इकलौते वारिस ललित कुमार ने बताया कि उनके पूरे परिवार को डायन बताकर जला दिया गया. उन्होंने बताया कि हत्या के बाद शवों को पानी में फेंक दिया गया

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मृतकों में पति-पत्नी और उनके तीन बच्चे शामिल हैं। बताया जा रहा है कि गांव के कुछ लोगों ने महिला पर “डायन” होने का आरोप लगाया और इसी अंधविश्वास के चलते उन्होंने पूरे परिवार को निशाना बना डाला। पहले पूरे परिवार की बेरहमी से पिटाई की गई और फिर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। चीख-पुकार के बीच कोई उन्हें बचाने नहीं आया।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल को सील कर दिया गया। साथ ही फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है, जो घटनास्थल से साक्ष्य इकट्ठा कर रही है। मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी घटनास्थल पर पहुंचे हैं और पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पुष्टि की है कि हत्या का कारण अंधविश्वास और “डायन प्रथा” से जुड़ा हो सकता है। इस जघन्य कांड में शामिल आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। गांव के अधिकांश लोग डर के कारण गांव छोड़कर फरार हो गए हैं, जिससे आरोपियों की धरपकड़ में परेशानी आ रही है।

बिहार में डायन प्रथा को लेकर पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन यह ताजा मामला बेहद निर्मम और भयावह है। सामाजिक संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और सरकार से दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल पुलिस हर एंगल से मामले की जांच में जुटी है और प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार के अन्य परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।

यह घटना एक बार फिर से समाज में व्याप्त अंधविश्वास, अशिक्षा और पिछड़ेपन पर सवाल खड़ा करती है। बिहार सरकार और प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी है कि यदि ऐसे मामलों पर कठोर और समयबद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो यह सामाजिक बर्बरता और भी विकराल रूप ले सकती है।

 

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