शब्द दूत ब्यूरो (25 जून 2025)
देहरादून। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने एक 46 वर्ष पुराने बैंक धोखाधड़ी के मामले में लंबे समय से फरार चल रहे घोषित अपराधी सतीश कुमार आनंद को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला वर्ष 1978 में बैंक ऑफ इंडिया से ₹5.69 लाख की धोखाधड़ी से जुड़ा है।
सीबीआई ने 5 मई 1978 को इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इनमें उस समय के बैंक शाखा प्रबंधक, सतीश कुमार आनंद और अशोक कुमार शामिल थे। जांच के अनुसार, 1977 में बैंक शाखा प्रबंधक ने सतीश कुमार आनंद के साथ मिलकर एक निजी कंपनी को जाली रसीदों और झूठे बिलों के आधार पर कर्ज दिया था। इसमें माल भेजने की झूठी जानकारी देकर बैंक को ₹5.69 लाख का नुकसान पहुंचाया गया, जो सतीश कुमार आनंद को अवैध लाभ के रूप में मिला।
जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने तीनों आरोपियों के खिलाफ विशेष न्यायाधीश, सीबीआई अदालत, देहरादून में आरोप पत्र दाखिल किया था। 19 जून 1985 को अदालत ने सतीश कुमार आनंद और अशोक कुमार को दोषी ठहराते हुए 5 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹15,000 के जुर्माने की सजा सुनाई थी, जबकि बैंक शाखा प्रबंधक को बरी कर दिया गया था।
हालाँकि, सजा सुनाए जाने के बाद सतीश कुमार आनंद फरार हो गया और 30 नवम्बर 2009 को सीबीआई की विशेष अदालत, भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, देहरादून ने उसे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित कर दिया था।
अब सीबीआई की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया है और उसे आज 25 जून 2025 को विशेष न्यायाधीश, सीबीआई, देहरादून की अदालत में प्रस्तुत किया गया।
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