@शब्द दूत ब्यूरो (25 जून 2025)
देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत एक बार फिर अपनी भावनात्मक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चाओं में हैं। इस बार उन्होंने अपने पुत्र आनंद रावत से जुड़ी निजी और राजनीतिक अपेक्षाओं को सार्वजनिक मंच पर साझा किया है, जो प्रदेश की राजनीति में नई संभावनाओं और पारिवारिक समीकरणों की ओर संकेत करती है।
सोशल मीडिया पोस्ट में हरीश रावत ने लिखा, “पिछले कुछ दिनों से मैं प्रयास कर रहा हूँ कि आनंद, मेरे मंझले पुत्र, मेरे साथ रहें। मेरे साथ रहने के आग्रह को लेकर आनंद के मन में क्या है, यह मैंने उनसे अभी बात नहीं की है!” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह चाहते हैं कि उनके परिवार से कोई व्यक्ति उनकी “उत्तराखंडियत की मशाल” को आगे बढ़ाए, जिसे वे वर्षों से संजोए हुए हैं।
हरीश रावत ने कहा कि वह अपने पुत्र को राजनीति में किसी विशेष रास्ते की बाध्यता नहीं देना चाहते, लेकिन यह जरूर चाहेंगे कि वह कांग्रेस की राह चुने। उन्होंने अपनी बेटी अनुपमा रावत का भी जिक्र किया जो हरिद्वार ग्रामीण से विधायक हैं। अनुपमा की प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि वह क्षेत्र की सेवा में इतनी रम गई हैं कि उन्हें कभी बच्चे और घर तक नजर नहीं आते।
अपने बड़े बेटे विरेंद्र रावत को लेकर उन्होंने कहा कि वह भी हरिद्वार मय हो गए हैं और देहरादून में रहकर उनके राजनीतिक मिशन को आगे बढ़ाने में समय नहीं दे पाते।
हरीश रावत ने अंत में उम्मीद जताई कि वह आनंद रावत में उस रुचि को जगा पाएंगे जो उनके राजनीतिक उत्तराधिकार और सामाजिक मिशन को आगे ले जा सके। उन्होंने लिखा, “देखता हूं कितनी सफलता मिलती है?”
राजनीतिक गलियारों में इस पोस्ट को हरीश रावत की एक भावनात्मक अपील और संभावित राजनीतिक उत्तराधिकारी की खोज के रूप में देखा जा रहा है। साथ ही यह संकेत भी मिल रहे हैं कि रावत परिवार की अगली पीढ़ी में से किसे नेता की भूमिका में आगे लाया जा सकता है, इसकी जमीन तैयार की जा रही है।
गौरतलब है कि हरीश रावत उत्तराखंड की राजनीति में एक अनुभवी और प्रभावशाली चेहरा रहे हैं, और उनकी यह पोस्ट एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत का संकेत मानी जा रही है।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal