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एशिया की टॉप यूनिवर्सिटीज़: भारत का स्थान और शिक्षा क्षेत्र की नई दिशा, ख़ास रिपोर्ट

@शब्द दूत ब्यूरो (17 जून 2025)

एशिया का उच्च शिक्षा क्षेत्र अब वैश्विक स्तर पर तेजी से उभर रहा है। दुनिया की अग्रणी रैंकिंग संस्थाओं QS (Quacquarelli Symonds) और Times Higher Education (THE) द्वारा जारी 2025 की रिपोर्टों में एशिया की कई यूनिवर्सिटीज़ ने शीर्ष स्थान प्राप्त किए हैं। सिंगापुर, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया की संस्थाओं ने जहां लगातार शीर्ष स्थान बनाए रखा है, वहीं भारत ने भी अपनी स्थिति में आंशिक सुधार किया है।

एशिया की शीर्ष यूनिवर्सिटियाँ (QS Asia Rankings 2025 के अनुसार):

  1. National University of Singapore (NUS), सिंगापुर – एशिया में प्रथम स्थान, वैश्विक नवाचार और रिसर्च में अग्रणी।
  2. Peking University, चीन – विज्ञान और समाजशास्त्र के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान।
  3. Tsinghua University, चीन – इंजीनियरिंग व तकनीकी शिक्षा में विश्वस्तरीय संस्थान।
  4. University of Hong Kong (HKU) – चिकित्सा, कानून और मानविकी में उच्च स्थान।
  5. Nanyang Technological University (NTU), सिंगापुर – तेजी से प्रगति करता युवा विश्वविद्यालय।
  6. University of Tokyo, जापान – नोबेल विजेता शोधार्थियों का गढ़।
  7. Seoul National University (SNU), दक्षिण कोरिया – नवाचार और अनुसंधान में अग्रणी।
  8. Fudan University, चीन – अंतरराष्ट्रीय संबंध और सामाजिक अध्ययन में विशेषज्ञता।

भारत की स्थिति: कौन है सबसे आगे?

भारत की उच्च शिक्षा संस्थाएँ अभी भी एशिया के शीर्ष 20 में जगह नहीं बना पाईं हैं, लेकिन IITs और IISc ने शीर्ष 100 में मजबूती से जगह बनाई है।

  • IIT Bombay – एशिया में 45वां स्थान (भारत में सबसे ऊपर)।
  • Indian Institute of Science (IISc), Bengaluru – अनुसंधान गुणवत्ता में भारत की शीर्ष संस्था।
  • IIT Delhi, IIT Madras, IIT Kanpur – एशिया की शीर्ष 100 यूनिवर्सिटीज़ में शामिल।
  • Delhi University (DU) – मानविकी और सामाजिक विज्ञान के लिए प्रसिद्ध, रैंकिंग में स्थान नीचे।

चुनौतियाँ जो भारत को पीछे रखती हैं:

  • शोध व नवाचार पर सीमित निवेश
  • फैकल्टी-स्टूडेंट रेशियो में कमी
  • अंतरराष्ट्रीय छात्रों की कम उपस्थिति
  • अत्यधिक सरकारी हस्तक्षेप और नौकरशाही अड़चनें

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से उम्मीदें

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) में भारत को वैश्विक शिक्षा हब बनाने की दिशा में कई सकारात्मक पहल की गई हैं जैसे:

  • अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति
  • शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहन देने के लिए विशेष कोष
  • बहुभाषीय शिक्षा, लचीला पाठ्यक्रम और क्रेडिट बैंक की अवधारणा

निष्कर्ष

भारत के पास विशाल जनसंख्या और युवा शक्ति जैसी पूंजी है, लेकिन इसे गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा में बदलने के लिए दीर्घकालिक नीति और मजबूत क्रियान्वयन की जरूरत है। जब तक शिक्षण संस्थानों को आत्मनिर्भरता, अकादमिक स्वतंत्रता और पर्याप्त संसाधन नहीं मिलते, तब तक वे चीन, जापान और सिंगापुर जैसी प्रतिस्पर्धा में पीछे रहेंगे। फिर भी, जो प्रगति अब तक हुई है वह आने वाले समय के लिए आशाजनक है।


लेखक: शिक्षा संवाददाता, शब्ददूत.कॉम | स्रोत: QS Asia Rankings 2025

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