@शब्द दूत ब्यूरो (11 मार्च 2025)
काशीपुर। पिछले कुछ समय से काशीपुर की तस्वीर बेहतर बनाने के प्रयास शुरू हो गये हैं। पिछले 25 वर्षों से काशीपुर जो कि एक समय में उत्तर प्रदेश का हिस्सा होने के बावजूद विकास का एक माडल बन गया था। उद्योगों का जाल, शैक्षिक संस्थानों की भरमार और राजनीतिक रूप से समृद्ध होकर देश भर में चर्चित रहा। यह कह सकते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री स्व नारायण दत्त तिवारी और पूर्व सासंद स्व सत्येन्द्र चन्द्र गुड़िया की सार्थक राजनीति के चलते काशीपुर को विशेष स्थान मिला हुआ था।
कहते हैं कि काशीपुर को शहर के लोगों की ही नजर लग गयी थी और शहर विकास की दौड़ में कहीं पीछे छूट गया। ऐसे में शहर के विकास को लगी नजर को उतारने के लिए एक ऐसे नजरबट्टू की दरकार थी जो इस शहर को बदहाली से उबार सके। समय बदलते देर नहीं लगती और एक नजरबट्टू की भूमिका निभाने वाले की तलाश आखिरकार पूरी हो गई। आपको याद दिला दें कि शहर का विकास शहर के स्थानीय निवासी की ही प्राथमिकता हो सकती है। दीपक बाली वही नजरबट्टू है जो कि विकास को तरसते काशीपुर के लिए उम्मीदों का दीपक बन सकता था। इस बात को यहाँ के स्थानीय निवासियों ने समझा और कमान सौंप दी। हालांकि कमान तो किसी और को भी सौंपी थी लेकिन उम्मीदें अधूरी रहीं।
अब शहर एक नये दौर की ओर बढ़ रहा है। जिसके अच्छे परिणाम आने की संभावना है। जिस तरह से महापौर बनने के बाद दीपक बाली फुल फार्म में आये हैं उससे लगता है कि शहर के लोगों का फैसला सही है। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है। सीएम पुष्कर सिंह धामी पहले भी काशीपुर आये, सीएम धामी ही क्यों और भी मुख्यमंत्री काशीपुर आये पर शहर को लेकर जो सदाशयता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिखाई है वो स्व एन डी तिवारी के बाद अब देखी गई है। करोड़ों की योजनाओं की सौगात जो कि एक सपना बन कर रह गयी थी वह हकीकत में बदल रही है। दरअसल काम करने और करवाने के लिए जुगलबंदी के साथ साथ वो भावना भी जरूरी है। महापौर दीपक बाली खुद के लिए महापौर बने हैं अगर यह सोचते हैं तो गलत है। दीपक बाली के अंदर एक विजन है और कुछ बेहतर करने की दृढ़ इच्छा और इसी के बल पर काशीपुर की तस्वीर को वह बेहतर रूप में देखना चाहते हैं।
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