@शब्द दूत ब्यूरो (23 फरवरी 2025)
काशीपुर। उत्तराखंड के कुमाऊं की परंपरागत बैठकी होली पूरे देश में प्रसिद्ध है। यहाँ काशीपुर में भी एक लंबे समय से कुमाऊंन होली बैठकों का आयोजन होता रहा है। आज भले ही पुरानी पीढ़ी के लोग इसे जारी रखे हुए हैं। पिछले दिनों मोहित उपाध्याय के निवास पर आयोजित बेठकी होली में काशीपुर, रुद्रपुर , रामनगर , हल्द्वानी , हरिद्वार ,नैनीताल व दिल्ली से आये होली गायकों ने समां बांध दिया।
आपको बता दें कि कुमाऊं की होली का वर्तमान स्वरूप चंद राजाओं के समय के दरबारी गायन से जुड़ा है। कुमाऊं की गायकी की होली में ब्रज और कन्नौज का प्रभाव देखने को मिलता है। कुमाऊं पौष मास से होली की फिजा में रंगने लगता है। फागुन मास में यह पूरे शबाब पर होता है और पूरा कुमाऊं होली की मस्ती में डूब जाता है। कुमाऊं में दो तरह की होली मनाने की परंपरा है। इसमें एक ‘बैठकी होली’ और दूसरी ‘खड़ी होली’ शामिल है। खड़ी होली और बैठकी होली में दो-तीन दर्जन से अधिक महिलाएं व पुरुष पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ अलग-अलग समूह बनाकर हर घर, गांव के मंदिर और चौपाल में भक्ति भाव में डूब कर होली के गीत गाते हैं।
कुमाऊं की बैठकी होली के गीत कई तरह के राग-रागिनियों में ढले होते हैं। कुमाऊं में कई दिनों तक विष्णुपदी होली गाई जाती है। वैसे पहाड़ों में होली की शुरुआत बसंत पंचमी के दिन से शुरू हो जाती है।उस दिन गणेश पूजन के साथ होली का झंडा गाड़ा जाता है और इस झंडे के ऊपरी भाग में पीले रंग की पताका लगाई जाती है।कुमाऊं में होली दहन से पहले फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन से होल्यार होली के रस और रंगत में आने लगते हैं। बैठकी होली में आने वाले होल्यारों की तादाद भी बढ़ने लगती है। बसंत पंचमी से लेकर फागुन पूर्णिमा तक यह त्योहार मनाया जाता है। इस मध्य महाशिवरात्रि का पर्व भी आता है। तभी कुमाऊं की होली में भगवान शिव और पार्वती के होली खेलने के प्रसंग से जुड़े गीत भी गाए जाते हैं। कुमाऊं में फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को कपड़ों में रंग डाला जाता है और इन कपड़ों को फाल्गुन मास की पूर्णिमा के अगले दिन पहनकर होली खेली जाती है।
यहाँ काशीपुर शहर में भी पारम्परिक कुमाऊंनी होली की बैठक मोहित उपाध्याय के आवास बैंक कॉलोनी में आयोजित होली गायन की शुरुआत माँ सरस्वती एवं श्री गणेश वंदना की वंदना से की गयी। गाईये गणपति जग वंदन, शंकर सुवन भवानी के नंदन।
दिल्ली से आये होलियार निधि जोशी ने राग श्याम कल्याण में होली गायन किया
बहुत दिनन के रूठे श्याम को , होली मैं मन लाऊँगी।
रामनगर से आये होलियार कैलाश त्रिपाठी ने राग काफी में होली गायन किया “तकत मोरी अंगिया का डोरा , या ब्रिज देश निगोड़ा”
काशीपुर के मनोज पंत और योगेश जोशी ने होली गायन किया। “धावा बूल गए गिरधारी , नन्द गावं के ग्वाल हैं भारी*
मोहित उपाध्याय ने राग जंगला काफी में होली गायन किया
” पिया ऐसी रंगा दीजो मोरी चुनरिया , जिसे पहनूं मैं साडी उमरिया”। बसंत बिष्ट ने रसिया में होली गायन किया
” कनैया आज कैसी होली खिलायी”
रामनगर के होलियार हीरा बल्लभ पाठक ने काफी में होली गायन किया। “आज निज घाट विच होरी मची हैं”
रात भर चली बैठकी होली का समापन प्रातः 4.00 बजे राग भैरवी से किया गया और सभी को होली की शुभकामनायें
“हो मुबारक मंजरी फूलों भरी , हो मुबारक सब को ये शुभ घड़ी” गाकर दी गईं। तबले पर संगत हरीश जोशी, दिव्यांश उपाध्याय , बसंत बिष्ट , चित्रेश त्रिपाठी, अभिषेक तिवारी आदि ने की।
बैठक में चंद्र मोहन भंडारी , संजय रेखारी , पूरन बिष्ट, चक्रेश जैन , मोहन अग्रवाल , मोहन बावरी , श्याम जोशी , शोभित गुड़िया , संजीव सक्सेना , जी सी जोशी , योगेश जोशी , मनोज पंत , विकास उपाध्याय आदि उपस्थित थे।
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