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काशीपुर :पार्टी के प्रति निष्ठा और समर्पण का पुरस्कार संदीप सहगल को, भाजपा से प्रत्याशी का चेहरा कौन? मेयर का रण होगा रोमांचक,निर्दलीय की संभावना से क्या दोहराया जायेगा इतिहास? एक आकलन

@विनोद भगत

काशीपुर । नगर निगम मेयर के लिए कांग्रेस ने अपने पत्ते खोल दिये हैं। पार्टी ने काशीपुर के लिए संदीप सहगल को मैदान में उतारा है। अनेक दावेदारों के बीच से संदीप सहगल को प्रत्याशी बनाकर काशीपुर नगर निगम का चुनावी रण दिलचस्प बना दिया है।

करीब डेढ़ दशक से कांग्रेस के समर्पित और निष्ठावान नेता संदीप सहगल को उनकी पार्टी के प्रति निष्ठा का पुरस्कार देकर कांग्रेस ने जता दिया है कि इस बार वह यहाँ चुनावी औपचारिकता निभाने के स्थान पर मुकाबले को गंभीरता से लड़ने के मूड में है। संदीप सहगल काशीपुर कांग्रेस के ऐसे कार्यकर्ता माने जाते हैं जो सिर्फ पार्टी के लिए संघर्ष करते रहे हैं। इस दौरान अनेक नेता उतार चढ़ाव के दौर में धैर्य खोकर पार्टी छोड़ गये लेकिन संदीप सहगल ने पार्टी को सर्वोपरि मानकर हर हाल में कांग्रेस के झंडे को उठाया है।

संदीप सहगल ने कांग्रेस को उस दौर में भी जिया जब लगातार कांग्रेस हार के दंश झेल रही थी। पार्टी के कार्यक्रमों में जितनी सक्रिय भूमिका संदीप सहगल तब निभाते थे जब वह महानगर कांग्रेस अध्यक्ष थे और तब भी जब वह कांग्रेस में किसी पद पर नहीं रहे। ऐसे में संदीप सहगल का धैर्य पार्टी हाईकमान को भाया और उन्हें तमाम दावेदारों के बीच तरजीह देते हुए मेयर के टिकट से नवाजा।

बात करें संदीप सहगल की व्यक्तिगत छवि की तो सुमधुर भाषी और व्यवहार कुशल व्यक्तित्व के स्वामी हैं। संदीप सहगल कांग्रेस के लिये बेहतर उम्मीदवार साबित होने जा रहे हैं इसमें कोई शक नहीं। शहर में संदीप सहगल की उम्मीदवारी को लेकर जिस तरह से लोगों की प्रतिक्रिया आ रही है वह भी अपने आप में इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस का यह कदम सही साबित होने जा रहा है। बात हार जीत की नहीं वह तो आने वाला समय बतायेगा। पर इतना अवश्य है कि पिछले कुछ चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी का सही चयन न होना भी कांग्रेस की लगातार हारों का एक प्रमुख कारण रहा है। थोपे हुये उम्मीदवारों को जनता के साथ साथ उनकी पार्टी के नेता ही नहीं पचा पाये थे। जिसका खामियाजा हार के रूप में पार्टी को भुगतना पड़ता रहा।

इधर भाजपा से हालांकि अभी प्रत्याशी घोषित नहीं किया गया है। माना जा रहा है कि दीपक बाली ही उम्मीदवार होंगे। ऐसे में इन दो दोस्तों के बीच काशीपुर के प्रथम नागरिक की दौड़ में कौन बाजी मार सकता है यह कहना अभी मुश्किल है। दरअसल निवर्तमान मेयर ऊषा चौधरी पर काशीपुर नगर निगम का चुनाव काफी हद तक निर्भर करता है। आपको याद दिला दें कि ऊषा चौधरी पार्टी से टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव तक लड़ चुकी हैं और उन्होंने जीत भी हासिल की है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इतिहास को दोहराते हुए क्या ऊषा चौधरी टिकट न मिलने की स्थिति में इस बार भी निर्दलीय मैदान में उतरेंगी? हालांकि अभी तक तो वह यही कहती हैं कि पार्टी जिसे भी टिकट देगी वह उसका समर्थन करेंगी। दावेदारी करना उनका अधिकार है।

यदि ऐसा होता है तो नगर निगम के मेयर का यह चुनाव अपने रोमांचक दौर में पहुंचेगा।

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