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रात भर जा रहे लोग… भारतीय हाथी नेपाल में क्यों मचा रहे आतंक? हैरान कर देगी ये वजह

@शब्द दूत ब्यूरो (05 मार्च 2024)

भारत और नेपाल के बीच हाथियों के आवागमन के लिए टनकपुर ब्रह्मदेव दशकों पुराना कॉरिडोर है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से लोगों ने यहां पर अतिक्रमण कर लिया है. अतिक्रमण की वजह से हाथी धीरे-धीरे इस रास्ते को छोड़ने लगे हैं. बार-बार रास्ता बदलने के कारण हाथी उग्र होते जा रहे हैं. गुस्सा होकर हाथी आबादी क्षेत्रों में प्रवेश कर जाते हैं और लोगों के घरों के साथ-साथ फसलों को भी नुकसाने पहुंचा रहे हैं.

पिछले दिनों हाथी भारत में टनकपुर के गैड़ाखाली, उचौलीगोठ, बूम, पचपकरिया, गुदमी आदि क्षेत्रों में काफी आतंक मचाए. फसलों को नुकसान पहुंचाया और घरों में तोड़-फोड़ की. हाथी लोगों पर हमला करने की कोशिश करते भी दिखे. अब यह हाथी नेपाल में पहुंच रहे हैं, ऐसे में वहां के लोगों की चिंताएं बढ़ने लगी हैं.

गेहूं की फसल उजाड़ रहे लोग

टनकपुर से होकर कंचनपुर पहुंच रहे हाथी नेपाली किसानों की गेहूं की फसल बर्बाद कर रहे हैं. इससे लोगों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. हाथियों के आतंक से परेशान नेपाल के किसान रात में जागकर और मशाल जलाकर अपनी फसलों की रक्षा कर रहे हैं. इस वजह से नेपाली नागरिक सीमा पर नाकेबंदी की मांग भी कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि जिस स्थान से हाथी नेपाल की आबादी में आ रहे हैं, उस स्थान को बंद किया जाए और पुराने कॉरिडोर से हाथियों की मूवमेंट करवाई जाए.

अतिक्रमण की वजह से बेकाबू हो रहे हाथी

भारत और नेपाल की सीमा पर शिवालिक कॉरिडोर स्थित है. हाथियों का यह कॉरिडोर अतिक्रमण की भेंट चढ़ा हुआ है. सीमावर्ती इलाकों में मानवीय गतिविधियों ने हाथियों को शिफ्ट होने पर मजबूर कर दिया है. दोनों तरफ के लोगों ने होथियों के मार्ग में कच्चा निर्माण कर दिया है. जिस कारण हाथी अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों की तरफ रुख कर जाते हैं. कभी-कभी हाथी पहाडों तक भी पहुंच जाते हैं.

हाथियों के घरों की तरफ गतिविधियां कम करनी पड़ेगी

देहरादून स्थित डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिक डॉ. हरीश गुलेरिया के मुताबिक, इंसान की जंगलों में बढ़ रहीं गतिविधियों के कारण हाथी आबादी क्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं, जो कि पहले नहीं था. पिछले कुछ समय से ऐसा हो रहा है. कॉरिडोर बचाने के लिए डब्ल्यूआईआई योजना बनाने पर काम कर रहा है. दोनों देशों की बीच कई वर्षों से कॉरिडोर है. हाथियों से बचने के लिए उनके घरों की तरफ मानवीय गतिविधियां कम करनी पडेंगीं.

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