@शब्द दूत ब्यूरो (11 जनवरी, 2024)
उत्तराखंड में अपनी खिसकती जमीन को हासिल करने के लिए कांग्रेस अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी पार्टी भाजपा सरीखी बेताब नहीं दिखाई दे रही। सियासी दमखम दिखाने और भाजपा से दो-दो हाथ करने के लिए कांग्रेस के पास लोकसभा चुनाव का मौका तो है। लेकिन भाजपा की तैयारियों के आगे कांग्रेस कहीं ठहरती नजर नहीं आ रही है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि अगर अभी भी कांग्रेस नहीं जाएगी तो प्रदेश में नारे लिखने के लिए उसे एक दीवार तक नहीं मिलेगी।
उधर, भाजपा ने दीवारों पर नारे लिखने का अभियान युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है और इधर कांग्रेस अभी तक अपना प्रचार अभियान भी शुरू नहीं कर पाई है। तेजतर्रार राजनेता कुमारी शैलजा को पार्टी का प्रभारी बनाए जाने से कांग्रेस में जो थोड़ी बहुत ऊर्जा कौंधी तो वह भी कुछ दिन बाद थम सी गई।
उधर, भाजपा पीएम मोदी की जनसभाओं के कार्यक्रम तक फाइनल करने वाली है। फरवरी आखिर तक एक दर्जन केंद्रीय नेताओं की जनसभाओं के कार्यक्रम तय हो रहे हैं। बूथ से लेकर प्रदेश तक सम्मेलनों, संपर्क अभियानों के जरिए वह चुनाव प्रचार में जुट चुकी है। इसके विपरीत कांग्रेस की तैयारियां बयानबाजी और पार्टी दिग्गजों के कुछ दौरों तक ही सीमित है।
हालांकि कुमारी शैलजा का 15 जनवरी को राजधानी देहरादून में पूरे दिन का कार्यक्रम है, लेकिन पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से बातचीत के लिए मात्र तीन घंटे निर्धारित किए गए हैं। अब इन तीन घंटों में स्वागत समारोह के बीच वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी मिलेंगी, विधायकों, पूर्व विधायकों के साथ वर्ष 2022 के विधानसभा प्रत्याशी रहे नेताओं से भी बातचीत करेंगी।
पार्टी सूत्रों की मानें तो उत्तराखंड आगमन से पहले प्रदेश प्रभारी की ओर से संगठन स्तर पर रिपोर्ट तलब की गई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि वह पूरे होमवर्क के साथ उत्तराखंड आ रही हैं। आने वाले दिनों में उनकी क्लास में इस होमवर्क में पार्टी नेताओं से गहरी मंत्रणा होगी।
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