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उत्तराखंड: सामान्य बारिश में अब तक एक हजार करोड़ का नुकसान, 84 लोगों की मौत

@शब्द दूत ब्यूरो (24 अगस्त, 2023)

उत्तराखंड में हो रही भारी बारिश को बेशक असामान्य तौर पर देखा जा रहा हो, लेकिन आईएमडी यानि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, अभी हो रही बारिश लगभग सामान्य हैं। कुल मिलाकर सामान्य बारिश में राज्य का ये हाल है तो सामान्य से अधिक बारिश होने पर राज्य की स्थिति क्या होगी इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

मौसम विभाग ने एक जून से 23 अगस्त के बीच जितनी बारिश रिकार्ड की है, वह अभी तक तो सामान्य ही है। चिंता की बात है कि इस सामान्य बारिश में भी उत्तराखंड को अब तक एक हजार करोड़ की परिसंपत्तियों का नुकसान हो चुका है। विभिन्न प्राकृतिक आपदाओं में अब तक 84 लोग मारे जा चुके हैं। नदियां उफान पर हैं, 253 मोटर मार्ग अवरुद्ध हैं और 91 पुलों को भारी क्षति पहुंची है।

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के मुताबिक मानसून सीजन के दौरान अभी तक सामान्य तौर पर होने वाली 904.20 मिलीमीटर बारिश के सापेक्ष 1019 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई है। इस हिसाब से एक जून से 23 अगस्त तक 13 फीसदी ही अधिक बारिश हुई है। चूंकि सामान्य से 19 फीसदी अधिक तक बारिश को सामान्य की श्रेणी में लिया जाता है। इसलिए इसे सामान्य बारिश ही माना जाएगा।

मौसम विज्ञानियों का मानना है कि उत्तराखंड में भारी बारिश होने की वजह मानसून सिस्टम का उत्तराखंड की तलहटी पर आ जाना है। इसके अलावा नमी वाली हवाओं के 90 डिग्री कोण में उत्तराखंड के ऊपर आ जाने से ऐसी स्थितियां बनी। उत्तर पश्चिमी हवाओं का तेजी से बढ़ना भी भारी बारिश का कारण बना। वैज्ञानिकों का मानना है कि जब ये तीनों कारण मिलते हैं तो डेढ़ से दो किलोमीटर के दायरे में मूसलाधार बारिश होती है।

जिलावार देखें तो इस मानसून सीजन में बारिश ने सबसे ज्यादा कहर देहरादून, हरिद्वार, बागेश्वर और चमोली जिलों में बरपाया है। बागेश्वर में तो इस बार सामान्य से 178 प्रतिशत अधिक यानि अत्यधिक बारिश हो चुकी है। हरिद्वार जिले में सामान्य से 83 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। जिले में जलभराव और बाढ़ के कारण सबसे गंभीर स्थिति है। इसी प्रकार चमोली जिले में 67 प्रतिशत तो देहरादून में 58 प्रतिशत बारिश सामान्य से अधिक हो चुकी है।

पिथौरागढ़, चंपावत, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, अल्मोड़ा जिलों में सामान्य से कम बारिश रिकार्ड की गई है। इन जिलों के अलग-अलग इलाकों में कहीं कम बारिश हुई है तो कहीं बहुत ज्यादा, जिससे वहां भूस्खलन, बाढ़, जलभराव की घटनाएं सामने आई हैं।

 

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