@शब्द दूत ब्यूरो (18 अगस्त, 2023)
बागेश्वर उपचुनाव की सरगर्मियां अब जोर पकड़ने लगी हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं, जिसके बाद दोनों ओर से चुनावी तीर छोड़े जाने लगे हैं। साल 2022 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके बसंत कुमार को कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी घोषित किया है, जिसके बाद ये उपचुनाव दिलचस्प होने वाला है।
नामांकन खत्म होने के साथ ही अब बागेश्वर उपचुनाव के लिए प्रचार शुरू हो गया है। जीत के दावों के साथ ही सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने हैं। दोनों ही पार्टियां एक दूसरे पर खुलकर आरोप-प्रत्यारोप भी कर रही हैं। इसके अलावा सवालों के सहारे भी सियासी जंग लड़ी जा रही है। बीजेपी ने इंडिया गठबंधन पर सवाल दागा तो कांग्रेस ने भी बीजेपी और धामी सरकार से चार सवाल पूछे लिए।
कांग्रेस ने पूछा है कि साल 2022 के चुनाव में बीजेपी ने सख्त भू-कानून को जो वादा किया था उसका क्या हुआ? आखिर अब तक भू कानून क्यों लागू नहीं किया गया?
कांग्रेस ने दूसरा सवाल उत्तराखंड में भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी को लेकर है। कांग्रेस ने पूछा है कि युवाओं की मांग के बाद भी भर्ती घोटाले की सीबीआई जांच क्यों नहीं कराई गई?
तीसरा सवाल उत्तराखंड और बागेश्वर के नौजवानों से जुड़ा है। कांग्रेस ने अग्निवीर योजना को युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करार देते हुए पूछा है कि बीजेपी सरकार ने इसे क्यों लागू होने दिया?
चौथा और आखिरी सवाल अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। कांग्रेस ने भाजपा से पूछा है कि आखिर अंकिता मर्डर केस का वीआईपी कौन है?
जाहिर है कि कांग्रेस इन चार सवालों को मुद्दा बनाकर भाजपा को घेरना चाहती है। अब इंतजार बीजेपी के जवाब का है। जिसके बाद बागेश्वर उपचुनाव की सियासी लड़ाई और भी दिलचस्प होने के आसार हैं।
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