काशीपुर (17जुलाई 2023) । लगभग अस्सी वर्ष के आसपास पहुंच चुके पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जलभराव में सड़क पर जल सत्याग्रह पर बैठे। इसमें सरकार को कोई खास बात न तो नजर आयेगी और न कोई फर्क पड़ेगा। लेकिन आश्चर्यजनक बात तो यह है कि प्रदेश के कांग्रेसियों पर भी अपने दल के इस वयोवृद्ध नेता के इस आंदोलन से कोई फर्क नहीं पड़ता। कांग्रेसियों को फ़र्क सिर्फ़ भाजपा, नरेन्द्र मोदी के विरोध और राहुल गांधी की प्रशंसा के अलावा कोई काम नहीं है। जनता से जुड़े मुद्दे कांग्रेस के लिए कोई अहमियत नहीं रखते।
पूरे प्रदेश में बरसात से जलभराव के चलते जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पूरे प्रदेश में एक वयोवृद्ध कांग्रेस नेता हरीश रावत इस पर मुखर दिखाई दिये। हैरत की बात तो यह है कि प्रदेश के किसी भी शहर से कांग्रेस जनों ने उनके इस जल सत्याग्रह पर अपना समर्थन जताया है। प्रदेश के कांग्रेसियों की इस मुद्दे पर चुप्पी अपने आप में यह साबित करती है कि कांग्रेस इस बार भी जनता का समर्थन हासिल नहीं कर पायेगी।
बात करते हैं काशीपुर की। यहां पूरे शहर की तमाम कालोनियों में बारिश से जलभराव की वजह से नागरिक हलकान हैं। लेकिन स्थानीय कांग्रेस की ओर से किसी भी नेता ने शहर की इस समस्या को लेकर प्रभावी तरीके से आवाज नहीं उठाई। अब कम से कम अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेता हरीश रावत के जल सत्याग्रह से कुछ सीख ले लेते। जनता के नजदीक जाकर उनकी समस्या को सुनने का स्थानीय कांग्रेसी समय नहीं निकाल पाते। दरअसल उन्हें नरेंद्र मोदी व भाजपा पर हमले के साथ ही राहुल गांधी पर आ रही मुसीबतों की ज्यादा चिंता है। राष्ट्रीय मुद्दों पर हाईकमान के नेताओं के आदेश का पालन कर पुतला फूंकने के काम को ही राजनीति समझ लिया गया है।
यदि अब भी नहीं चेते तो आगामी चुनावों में भी कांग्रेस को जीत की आशा छोड़ देनी चाहिए।
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