ये फिल्म पहाड़ी गांव के एक साधारण दम्पति की कहानी है जिसके मुख्य पात्रों में, पति की भूमिका में चन्दन बिष्ट हैं और पत्नी की भूमिका में विनम्रता राय हैं। फिल्म के सभी पात्र पहाड़ी गावं में रहने वाले लोगों की तरह लगते है और ये उत्तराखण्ड के गांवों के हर उस दंपति की कहानी है जिसके पास कोई स्थाई रोजगार नहीं है क्यूंकि पहाड़ों के गांव में ज्यादा परिवारों की आर्थिक हालात ऐसी ही हैं।
फिल्म में नम्रता राय जी पहाड़ों की उन सभी महिलाएं का प्रतिनिधित्व करती हुई दिखती हैं जिसने पीढ़ियों से, सुबह के उजाले से और रात होने तक,कोल्हू के बैल की तरह काम किया है,सिर्फ इसलिए कि उसके बच्चे पढ लिख के अच्छा जीवन जिएं, उसको पता है पढ़ाई से ही उसके बच्चों का भविष्य है, पहाड़ में पढ़ लिख कर अच्छी नौकरी के अलावा कोई विकल्प भी नहीं है ,पर पुरुषवादी मानसिकता की वजह से, उसका झुकाव बेटे की तरफ ज्यादा है और बेटी की तरफ कम है, ये पहाड़ के पीढ़ियों की पुरुषवादी मानसिकता को दिखाती है। जिसका प्रतिरूप उसके घर में बैठी उसकी ननद है जो शादी के बाद भी मायके में ही रहती है।पर इस सब के बाद भी वह अपने परिवार को आगे बढाने के लिए हर पल संघर्ष कर रही है। पति की भूमिका में चंदन बिष्ट जी हैं जो हर उस पहाड़ी पुरुष की कहानी है जो नौकरी करने बड़े शहरों में जाता है जब वहां से भी हार कर गांव आ जाता है और वहां भी निष्फल हो जाता है फिर वह आर्थिक और सामाजिक रूप से इतना कमज़ोर हो जाता है कि अपने परिवार से दूर भागने लगता है और वह धीरे-धीरे इतना थक जाता है की शराब पीने लगता है और अपना प्रभुत्व दिखाने के लिए पुरानी कुरीतियों का सहारा लेता है। इसी तानेबाने से बनी यह फिल्म पहाड़ के गांवों में परिवारों के बिखरने की कहानी है जिसको हर किसी को देखना चाहिए।
फिल्म के निर्देशक और लेखक अजीतपाल जी हैं जो पंजाब से हैं पर फिल्म देखने के बाद लगता है उन्होंने फिल्म को लिखने से लेकर और बनाने तक पहाड़ी क्षेत्र पर बहुत शोध किया है। फिल्म का हर एक पात्र आपको उत्तराखण्ड के गाँव में दिख जायेगा। फिल्म के निर्देशक अजीतपाल जी और उनकी पूरी टीम का बहुत बहुत धन्यवाद।
-संतोष सिंह Studio UK 13
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