@शब्द दूत ब्यूरो (20 मार्च 2023)
काशीपुर। लंबे समय से चुनाव हार रहे कांग्रेस नेताओं में अब निराशा साफ देखी जा सकती है। इस वर्ष निकाय चुनाव होने हैं और चुनाव में ज्यादा समय भी नहीं बचा है। लेकिन पिछले इतिहास को देखा जाए तो कोई भी चुनाव आने से काफी पहले कांग्रेस के स्थानीय नेताओं में दावेदारी को लेकर होड़ मच जाती थी। लेकिन इस बार तो कांग्रेस की किसी नेता की ओर से खुद को मेयर चुनाव के प्रत्याशी के रूप में दावेदारी न करने से लगता है पिछली हारों से पार्टी के नेता मैदान छोड़ चुके हैं।
यहां यह गौरतलब है कि काशीपुर से भाजपा के नेताओं की दावेदारी सामने आने लगी है। ऐसे में चुनाव होने या यूं कहें कि चुनाव की घोषणा से पहले ही स्थानीय कांग्रेस नेता यह मान चुके हैं कि बाजी उनके हाथ लग पाना पहले की तरह टेढ़ी खीर साबित होगी। कांग्रेस के कुछ नेताओं से ने बातचीत की। खास बात यह रही कि हर किसी ने आफलाइन बात करने की गुजारिश की। कांग्रेस के अधिकांश नेताओं का कहना था कि क्या फायदा? हम तैयारी और मेहनत करें लेकिन हाईकमान किसी नये चेहरे को प्रत्याशी के रूप में थोप दे। ऐसे में जीत की संभावनाएं क्षीण होती रही हैं। पहले के चुनावों में जिन उम्मीदवारों को घोषित किया गया उसका परिणाम यहां हार के रूप में सामने आया।
बार बार स्थानीय जुझारू कांग्रेस नेता की उपेक्षा का परिणाम यह है कि पार्टी को लगातार जीत के लिए तरसना पड़ रहा है। अब चाहे विधानसभा चुनाव हों या फिर निकाय चुनाव कहानी पहले से तय होती है।इस कहानी का क्लाइमेक्स हर कोई जानता है।
कांग्रेस के नेताओं से हुई बातचीत में लगातार हार की निराशा साफ झलक रही थी। शायद यही कारण है कि इस बार निकाय चुनाव में मेयर पद की दावेदारी से यहां के कांग्रेसी नेताओं में कोई खास उत्साह नहीं है। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने तो यहां तक कहा कि खानापूर्ति के लिए वह इस चुनाव में भागीदारी करेंगे। हाईकमान के फैसले से बंधे रहना उनकी पार्टी के प्रति निष्ठा के लिए जरूरी है।अब जीत के लिए नहीं वरन उन्हें हराता कौन है यह देखना होगा।
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