@शब्द दूत ब्यूरो (02 फरवरी 2023)
देहरादून। काशीपुर में गोविषाण किले के आसपास निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध के नियमों में ढील देने के लिए नया बॉयलाज तैयार किया जा रहा है। संरक्षित स्मारकों का सर्वे शुरू हो गया है। काशीपुर के गोविषाण किले के सर्वे के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण देहरादून की टीम इसी महीने 6-7 फरवरी को आ रही है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सीए देहरादून नीरज मैठाणी ने शब्द दूत को बताया कि अभी बॉयलाज बनाने की तैयारी चल रही है। उन्होंने बताया कि संरक्षित स्मारकों के आसपास किये जाने वाले निर्माण कार्यों को देखा जायेगा। इस बात का ध्यान रखा जायेगा कि किये गये निर्माण कार्यों की ऊंचाई संरक्षित स्मारकों से ऊंची न हो।
उन्होंने बताया कि एएसआई राज्य में स्थित संरक्षित स्मारकों के आसपास निर्माण कार्यों के नियमों में बदलाव करने जा रही है। इसके लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने नये बॉयलाज बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की टीम उत्तराखंड के संरक्षित स्मारकों का सर्वे शुरू कर चुकी है।
जो बॉयलाज बनाया जायेगा उसके लिए सके राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) की ओर से चयनित चंडीगढ़ गवर्नमेंट आर्किटेक्ट कॉलेज के विशेषज्ञों की सहायता ली जा रही है। ये नया बॉयलाज कुमाऊं व गढ़वाल मंडल की सभी साइटों में लागू किया जाएगा। इससे लाखों लोगों को राहत मिल सकती है।
बताते चलें कि एएसआई के 1956 में बनाए गए नियम के अनुसार किसी भी संरक्षित स्मारक की 100 मीटर परिधि को निर्माण या पुनर्निर्माण कार्यो के लिए पूरी तरह निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया हुआ है। 100 मीटर से बाहर आगे 200 मीटर तक के एरिया को निषिद्ध घोषित किया गया है। निषिद्ध क्षेत्र में निर्माण या पुनर्निर्माण के लिए एनएमए से अनुमति लेनी अनिवार्य है। अनुमति की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि लोग दशकों से स्मारकों के आसपास अवैध रूप से निर्माण करते जा रहे हैं। अब एनएमए संरक्षित स्मारकों के आसपास निर्माण या पुनर्निर्माण कार्यों के लिए नए सिरे से बायलॉज तैयार करने जा रही है।
अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम के सर्वे के बाद काशीपुर के गोविषाण टीले और देहरादून के कलिगा युद्ध स्मारक क्षेत्र का सर्वे कर बायलॉज तैयार करेगी। सरक्षित स्मारकों के इन्हीं बायलॉज को उत्तराखंड के सभी 43 संरक्षित स्मारकों में लागू किया जाएगा।
संरक्षित स्मारकों में बने मंदिर की ऊंचाई के आधार पर आसपास के क्षेत्र में निर्माण की सीमा तय करेगी। उसके बाद प्रतिषिद्ध या निषिद्ध क्षेत्र की परिधि काफी घट सकती है। निषिद्ध क्षेत्र में उन्हीं स्थानों पर निर्माण या पुनर्निर्माण पर पाबंदी लग सकती है, जहां पर मकान बनने से स्मारक ढक जाता है। स्मारकों के आसपास भी निर्माण के लिए मानक तय हो जाएंगे। अभी बॉयलाज बनाने की प्रक्रिया चल रही है और कितनी राहत लोगों को मिलेगी यह नये बॉयलाज के सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो पायेगा।
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