@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (18 जुलाई, 2022)
राष्ट्रपति चुनावों में संसद से लेकर राज्य की विधानसभाओं में सांसद और विधायक जब बैलेट बॉक्स में डालने के लिए अपने गुप्त मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं तो उन्हें मतपत्र पर अपने पसंद के उम्मीदवार को क्रम देना होता है और ये लिखने के लिए उन्हें वोटिंग चैंबर में एक खास पेन मिलता है। ये पेन आमतौर पर इलेक्शन कमीशन खास स्याही के साथ बनवाता है। इसमें जो स्याही होती है वो मिटती नहीं।
ये खास पेन सफेद रंग के प्लास्टिक का होता है। इस पर लिखा होता है इलेक्शन मार्कर पेन और साथ इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया भी अंकित होता है। ये पेन और स्याही कर्नाटक की एक कंपनी ही चुनाव आयोग को बनाकर भेजती है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रपति चुनावों में होता है.
अगर आपने कभी अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया हो तो वोट देने के समय आपकी अंगुली पर एक खास स्याही अंकित की जाती है, जिससे पता लगता है कि आपने वोट दे दिया। इस स्याही की खासियत ये होती है कि ये जल्दी मिटती नहीं। इसको मिटने में एक से दो हफ्ते लग ही जाता है। राष्ट्रपति के चुनाव में जो मार्कर पेन इस्तेमाल होती है उसमें यही स्याही इस्तेमाल होती है।
सफेद रंग के खोल वाली इस पेन की स्याही बैंगनी रंग की होती है। यह विशेष मार्कर पेन कर्नाटक के मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड द्वारा तैयार किया जाता रहा है। यही कंपनी मार्कर पेन और उसकी स्याही बनाकर भारतीय चुनाव आयोग को सप्लाई करती है। इसे चुनाव आय़ोग के लिए खास आर्डर पर सीमित संख्या में ही बनाया जाता है।
देश में चाहे विधानसभा का चुनाव हो या फिर लोकसभा का या फिर कोई भी खास चुनाव, उस सभी में इसी स्याही को इस्तेमाल में लाते हैं। ये स्याही देश में 1962 के पहले आम चुनाव से ही इस्तेमाल में आती रही है। केंद्रीय चुनाव आयोग पिछले 54 वर्षों से इसी स्याही का प्रयोग कर रहा है।
इस विशेष पेन का उपयोग 2017 के राष्ट्रपति चुनाव के बाद से ही किया जा रहा है। एक पेन से कम से कम 1000 बार वोट करना संभव होता है। इससे बस मतपत्रों पर रोमन अक्षरों या संख्याओं में उम्मीदवारों के नाम के आगे प्रिफरेंस नंबर लिखा जाता है। बैलेट पेपर पर कोई शब्द नहीं लिखा जा सकता है। अगर मतदाता ने किसी और मार्कर पेन से वोट किया है तो वो रद्द माना जाता है।
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