
देश के बेहोश अवाम को लखनऊ के लुलू माल में नमाज और हनुमान चालीसा में उलझकर सरकार अपना उल्लू सीधा करने में लगी है .अवाम को न ये होश है कि उसकी जेब कहाँ से और कितनी काट रही है और न उसे ये पता है कि उसकी आमदनी पर कितने पहरे बैठाये जा रहे हैं ? सरकार के प्रति अंधभक्ति जब जनता को महंगी पड़ने लगेगी तब तक खेल हो चुका होगा .
लखनऊ के लुलू माल में नमाज का विरोध करने वाले लोगों पर आप दया के अलावा और कुछ नहीं कर सकते.,माल एक मुस्लिम का है और वहां अधिकाँश कर्मचारी मुस्लिम ही हैं,ऐसे में यदि कोई अपने कर्मचारियों के लिए कोई सुविधा उपलब्ध करता है है तो किसी को कोई ऐतराज क्यूँ होना चाहिए ?विकल्प है कि आप यदि इतने ज्यादा कटटर विरोधी हैं तो लुलू माल की और पैर करके भी न सोएं,वहां न जाएँ .और यदि आपका काम लुलू माल में जाये बिना नहीं चलता तो शौक से जाएँ लेकिन वहां की व्यवस्था में अपनी टांग न फँसायें .
लूलू माल में नमाज के इंतजाम का विरोध करने वाले फ़ुरसतगंज में रहने वाले हमारे हिन्दू सभाई मित्र हैं. वे चाहते हैं कि यदि माल में नमाज का इंतजाम किया जा सकता है तो वहां हिन्दुओं के लिए भी कोई व्यवस्था की जाये.
अब इन अंधभक्तों से कौन पूछे कि आपके कितने लोग पांच वक्त की पूजा सब कामकाज छोड़कर करते हैं ? सुबह-सवेरे भगवान के सामने अगरबत्ती घुमाने के बाद केवल दुकानों में शाम के समय एक बार और दिया बत्ती की जाती है .यदि माल में आपकी कोई दूकान है और आप दिया-बत्ती करना चाहते हैं तो शौक से करें.देखें कौन आपको रोकता है ?
देश के अधिकांश हवाई अड्डों पर नमाज के लिए व्यवस्था सरकार की और से की जाती है.यदि हिन्दू सभाई के मित्रों की कोई हैसियत है तो सबसे पहले हवाई अड्डों से नमाज के लिए बनाये गए काशों पर ताले डलवाये जाएँ .ये हुड़दंगी हवाई अड्डों में घुसकर ही दिखा दें तो मान लिया जाये ,हनुमान चालीसा पढ़ना तो दूर की बात है .बहरहाल लुलू माल में नमाज का विरोध करने वाले हिन्दू सभाइयों को पहले राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मश्विरा कर लेना चाहिए. माल का उद्घाटन उन्होंने ही किया था वे प्रदर्शनकारियों के मुकाबले ज्यादा कटटर हिन्दू हैं .
अब आइये आपको बता दें कि आप हनुमान चालीसा पढ़ने में लगे हैं उधर सरकार ने आपकी आमदनी पर इतने पहरे बैठा दिए हैं की आपकी दम निकल जायेगी. अब आपकी आमदनी ढाई लाख से अधिक हो या न हो आपको आयकर विवरणी भरना ही होगी .नहीं भरेंगे तो जुर्माना लगेगा,सजा दी जाएगी क्योंकि अब सरकार ने आईटीआर फाइलिंग के कुछ नियमों में बदलाव किया है. आईटीआर भरने से पहले इन बदलावों के बारे में जान लेना जरूरी है, वर्ना हो सकता है कि आईटीआर भरने के बाद भी आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिल जाए.
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने हाल ही में एआईएस यानी एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट और टीआईएस यानी टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी लेना शुरू की है. कहने को डिपार्टमेंट ने इनकी शुरुआत आईटीआर फाइलिंग में पारदर्शिता लाने और टैक्सपेयर्स के लिए चीजें सरल बनाने के लिए की हैलेकिन हकीकत कुछ और है .नए एआईएस फॉर्म में टैक्सपेयर्स को अलग-अलग माध्यमों से हुई सारी कमाई का ब्यौरा दिया रहता है. इनमें सेविंग अकाउंट से ब्याज के रूप में हुई कमाई रेकरिंग और फिक्स्ड डिपॉजिट से इनकमडिविडेंड के रूप में मिले पैसे , म्यूचुअल फंड समेत सिक्योरिटीज के लेन-देन से हुई आय, विदेश से मिले पैसे आदि शामिल हैं.
सरकार आम जनता की मुश्कें कसती जा रही है और अरबों रूपये का गोलमाल करने वालों पर अदालतें मात्र दो-चार हजार रूपये का जुर्माना लगाकर अपने न्यायिक दायित्वों का निर्वहन कर रहीं हैं. अदालतें समाजिक सरोकारों के लिए लड़ने वालों पर पांच लाख का जुर्माना लगाती है और न देने पर कारावास की सजा सुनाती है ,लेकिन सेठों पर मेहरबान है और आप हैं की हनुमान चालीसा का पाठ करने में उलझे हुए हैं .हनुमान जी आपकी कोई मदद नहीं कर सकते ,क्योंकि अदालतें और सरकारें आपके साथ नहीं हैं .
हनुमान चालीसा पढ़ने से यदि छाछ पर लगा जीएसटी कम हो जाये जरूर पढ़िए,हनुमान चालीसा सुनकर यदि आप सरकार की जन विरोधी नीतियों का प्रतिकार कर सकते हैं तो जरूर पढ़िए हनुमान चालीसा .हनुमान चालीसा सुनकर देश का कोई चार सौ बीस सुधरने वाला नहीं है. नदियों में आने वाली बाढ़ रुकने वाली नहीं है. हिमालय में पहाड़ों का धंसकना बंद नहीं होने वाला .हनुमान चालीसा आत्मबल बढ़ाने का स्रोत है ,इसके बूते सियासत न होती है और न की जाना चाहिए .हनुमान चालीसा के मुद्दे पर महाराष्ट्र में एक चलती-फिरती सरकार चली गयी.आम आदमी को क्या मिला ? सांप नाथ गए तो नाग नाथ आ गए .
इस देश में असंख्य लोग हैं जो बिना किसी कामना के स्नान रटे-करते हनुमान चालीसा का पाठ कर लेते हैं. पढ़े हों या अनपढ़ सभी को हनुमान चालीसा कंठस्थ है क्योंकि उसमें लय है,रस है ,शक्ति है .लेकिन यदि आप उसी का पाठ किसी दुसरे की पूजा के खिलाफ करने की कोशिश करते हैं तो ये सब चीजे समाप्त हो जाती हैं .यदि खुद अनुमान जी से पूछा जाये तो वे भी इसके खिलाफ खड़े दिखाई देंगे. हनुमान जी तो दोस्ती करने वाले साधक हैं ,दोस्ती तोड़ने वाले नहीं .उन्होंने तो रावण तक को सीखने की कोशिश की .
बहरहाल हनुमान चालीसा की धमकियों से न लूलू माल बंद होगा और न वहां से नमाज की सुविधा हटाई जाएगी ,क्योंकि ये एक व्यक्तिगत आस्था का मामला है .उत्तर प्रदेश के विकास में अकेले योगी जी ही भागीदार नहीं हैं लूलू के मालिक और सब भागीदार हैं,हिन्दू,मुसलमान ,सिख और ईसाई सब .इसलिए अब ये तमाशे बंद किये जाना चाहिए .स्थानीय पुलिस ने चालीसा प्रेमियों को हिरासत में लेकर अपना काम किया है .अबको अपना-अपना काम करना चाहिए तभी देश आगे बढ़ सकता है .जय श्री राम
@ राकेश अचल
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