@शब्द दूत ब्यूरो (07 जुलाई 2022)
काशीपुर । नेक नियत मंजिल आसान वाली कहावत काशीपुर के स्पर्श मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर खरी उतरती है । हॉस्पिटल के चिकित्सकों के उपचार और सेवा भाव ने जहां एक और रोगियों को जीवन दान देकर रोगियों में जीवन के प्रति नई उमंग का संचार किया है तो वही हॉस्पिटल के संचालकों ने तीमारदारों में एक विश्वास कायम कर जनसाधारण में संदेश दिया है कि मानवीय सेवा की सच्ची भावना हो तो चिकित्सा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र को वास्तव में मानवीय सेवा के पवित्र मिशन में परिवर्तित किया जा सकता है।
काशीपुर क्षेत्र में अनेक हॉस्पिटल खुले हैं मगर स्पर्श हॉस्पिटल ने अल्प अवधि के बावजूद रोगियों और तीमारदारों में जो विश्वास कायम किया है। ऐसी मिसाल बहुत कम मिलती है और उसी का परिणाम है कि आशा और उम्मीद में बंधे रोगी स्वस्थ होकर यहां से खुशी खुशी अपने घरों को लौटते हैं।
हॉस्पिटल के संचालक डॉक्टर रजनीश कुमार शर्मा बताते हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद हमारा प्रयास रहता है कि हम रोगी को सहज, सस्ता और बेहतर उपचार उपलब्ध कराएं ताकि गरीब रोगी उपचार के अभाव में निराश ना हो। एक सवाल के जवाब में डॉ रजनीश कुमार शर्मा कहते हैं कि आयुष्मान योजना बहुत बेहतर योजना है । भारतवर्ष मैं क्योंकि अधिकांश जनसंख्या गरीब लोगों की है। जिससे गरीब से गरीब रोगियों के भी उपचार करने में यह योजना रामबाण सिद्ध हो रही है। रोगियों को इसका तत्काल लाभ मिल रहा है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि आयुष्मान योजना गरीब रोगियों के लिए उम्मीदों का नया सवेरा है। गरीब जनता में उम्मीद जगी है कि वह यदि बीमार होती है तो केंद्र व प्रदेश सरकारें उसके उपचार के लिए तैयार खड़ी है।
डॉक्टर रजनीश शर्मा का सुझाव है कि सरकार को इस योजना का यदि शत प्रतिशत लाभ लेना है और वास्तव में देश के गरीब रोगियों की मदद करनी है तो आयुष्मान योजना के क्रियान्वयन के मानकों में बदलाव लाना चाहिए ,क्योंकि इस योजना का लाभ गरीबों को मिले तो वास्तव में बहुत अच्छा है मगर दर्द तब होता है जब साधन संपन्न वे लोग भी इस योजना का लाभ उठाते हैं जो खुद अपना तो क्या औरों का भी उपचार कराने में सक्षम है। सरकार को चाहिए कि वह आर्थिक मानक भी तय करें, अन्यथा साधन संपन्न लोग गरीबों के अधिकारों पर कब्जा जमाए रखेंगे और गरीबों के लिए बनाई गई आयुष्मान योजना का लाभ साधन संपन्न लोग उठाते रहेंगे। इस योजना से अमीर और गरीब सभी रोगी ठीक हो रहे हैं मगर कम बजट वाले छोटे अस्पतालों का खुद का स्वास्थ्य तब गड़बड़ा जाता है जब सरकार की ओर से इस योजना के तहत हुए उपचार का भुगतान लंबे समय तक नहीं किया जाता । इससे छोटे अस्पतालों की आर्थिक स्थिति डगमगा जाती है क्योंकि उन्हें अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के साथ साथ रोगियों की कराई गई जांचों एवं अन्य आवश्यक खर्चो का भी भुगतान करना होता है ।
वह कहते हैं कि आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों के सामने मजबूरी भरा संकट यह है कि वह आर्थिक तंगी के बावजूद रोगियों का उपचार करने से इंकार भी नहीं कर सकते। ऐसे में उनके सामने बड़ा संकट है कि वें करे तो क्या करें? सरकार को अस्पतालों की असमंजसता भरी इस वेदना को भी समझना चाहिए।
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