@शब्द दूत ब्यूरो (05 जुलाई, 2022)
चीन सीमा के करीब मौजूद आदि कैलाश और ओम पर्वत पर्यटकों की जबरदस्त आमद से खतरे में नज़र आ रहा है। इन इलाकों तक रोड बनने के बाद भारी संख्या में सैलानी पहुंच रहे हैं, लेकिन ग्लेशियरों के करीब लगातार बढ़ रहा मानवीय हस्तक्षेप बड़े खतरे की ओर इशारा कर रहा है।
दरअसल,आदि कैलाश और ओम पर्वत तक रोड आने के बाद पहली बार यहां सैलानियों का तांता भी नजर आया। सैलानियों की बढ़ती तादाद भले ही पर्यटन कारोबारियों के लिए ख़ुशी को मामला हो, पर्यटकों की बढ़ती आमद से इन क्षेत्रों के ग्लेशियर सीधे प्रभावित हो रहे हैं। हालात ये हैं कि पार्वती ताल, ओम पर्वत और आदि कैलास में सैलानी से पर्यावरण के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं।
अनछुए दुर्लभ स्थलों में जहां प्लास्टिक पहुंच गया है, वहीं पार्वती ताल सैलानियों के छोड़े कपड़ों से पटे हुए है। फिलहाल यहां एक महीने में 6000 से अधिक सैलानियों की आमद दर्ज हुई है। यही नहीं पूजा की सामग्री से भी ये अतिसंवेदनशील इलाके पटे पड़े हैं। इन इलाकों में लंबे समय से शोध कार्यों में जुटे वनस्पति विज्ञानियों का कहना है कि ग्लेशियर के करीब जरूरत से अधिक इंसानी दखल पर्यावरण के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकती है।
इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन ने भी ऊंचे इलाकों में बढ़ रहे मानवीय हस्तक्षेप पर चिंता जाहिर की है। आदि कैलाश जहां 19,500 फीट की ऊंचाई पर मौजूद है, वहीं ओम पर्वत 18 हजार फीट पर मौजूद है। इस साल सिर्फ गर्मियों में 6 हजार से अधिक सैलानी आदि कैलास और ओम पर्वत पहुंच चुके हैं। लेकिन प्रशासन और पर्यटन विभाग की ओर से इन सैलानियों के लिए कोई भी नियम अब तक नही बने हैं। यही वजह है कि साफ-सुंदर और धवल ग्लेशियर अब गंदे होने लगे हैं।
हालांकि पिथौरागढ़ के डीएम आशीष चौहान का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे. यही नही सैलानियों के लिए कड़े नियम भी तैयार किए जाएंगे।
ग्लेशियरों के करीब फैल रही गंदगी से नदियां अपने उद्गम पर ही गंदी हो रही हैं। यही नहीं इससे ग्लेशयरों के स्थिति में भारी बदलाव आ सकता है। ऐसे में बेहतर यही होगा कि इन इलाकों में आने वाले सैलानियों के लिए ठोस गाइडलाइन बने और उस पर सख्ती से अमल भी हो।
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