@शब्द दूत ब्यूरो (12 अप्रैल, 2022)
कांग्रेस में आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के पदों पर होने वाली नियुक्ति को लेकर भी किसका गुट भारी रहेगा, इस बात के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन पार्टी ने हरीश-प्रीतम गुटबाजी से इतर नियुक्तियां करने के साथ ही नई लीडरशिप को आगे लाने का प्रयास किया है।
प्रदेश कांग्रेस में नई नियुक्तियों के साथ ही पार्टी हाईकमान ने यह संदेश देने की भी कोशिश की है कि पार्टी में किसी भी स्तर पर गुटबाजी नहीं चलेगी। नेता प्रतिपक्ष के रूप में यशपाल आर्य को कमान सौंपी गई है। वह सभी को साथ लेकर चलने के लिए जाने जाते हैं। वह हरीश और प्रीतम दोनों की गुटों में बराबर पैठ रखते हैं।
कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में मिली हार के लिए पार्टी के भीतर गुटबाजी और अंतर्कलह का बड़ा कारण माना गया। प्रदेश की राजनीति के दो प्रमुख चेहरे हरीश रावत और प्रीतम सिंह अलग-अलग गुटों में बंटे नजर आए। पार्टी के तमाम मंचों पर एकता की बात तो हुई, लेकिन पूरे चुनाव में वह कहीं भी दिखाई नहीं दी।
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