@शब्द दूत ब्यूरो (31 अक्टूबर, 2021
उत्तराखंड के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही उत्तराखंड की राजनीति का सियासी पारा बढ़ता जा रहा है और तोड़-मरोड़ की राजनीति में राजनेता भी थाल के बैगन बनकर रह गए। कभी इस नाव में सवार होते हैं तो कभी उस नाव में। दलबदलू नेता सत्ता में काबिज होकर सत्ता की मौज लेते हुए दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आने वाले सभी नेताओं को 2017 के विधानसभा चुनाव का टिकट दिया था। मार्च 2017 में त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में जब उत्तराखंड में बीजेपी सरकार बनी तो 10 सदस्यीय मंत्रिमंडल में ठीक आधे यानी पांच मंत्री कांग्रेस से आने वाले नेताओं को बनाया गया। इनमें यशपाल आर्य, सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत, सुबोध उनियाल व रेखा आर्य शामिल थीं।
2022 के विधानसभा चुनाव आने से ठीक पहले सूबे की सियासी नब्ज को समझते हुए यशपाल आर्य ने अपने बेटे के साथ घर वापसी कर गए हैं। जिसके बाद उत्तराखंड की राजनीति के समीकरण पूर्ण रूप से बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं। ग्राफ में बड़ी कांग्रेस सत्ता वापसी की सपना देखने लगी तो वहीं उत्तराखंड की राजनीति में हलचल मनाने वाली आम आदमी पार्टी ऐसे दल बदलू नेताओं पर तंज कसते हुए कहा कि मुख्यमंत्री भाजपा का रहता है और पूरी कैबिनेट कांग्रेस की। कांग्रेस और भाजपा नूरी कुश्ती जैसा गेम खेल रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनाव में जनता इसका जवाब देगी।
दल बदलू नेताओं के दल बदलने से उत्तराखंड की राजनीति के समीकरण फिर से बदल कर रख दिए। लेकिन इस बार मजबूत विपक्ष और खुलकर दोनों ही पार्टियों के खिलाफ पहली बार चुनावी मैदान में उत्तराखण्ड में उतरने वाली आम आदमी पार्टी इस बार भाजपा और कांग्रेस को खुलकर बेनकाब करने का मन बना चुकी है। वहीं दलबदलुओं पर तीखे अंदाज में बयान देकर आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर भाजपा और कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी है।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal



