@विनोद भगत
उत्तराखंड में चुनाव सिर पर हैं लेकिन कांग्रेस में फिलहाल सब कुछ ठीक चल रहा नहीं दिखता। पार्टी अभी भी खेमेबाजी में बंटी दिख रही है। हरीश रावत को छोड़कर पार्टी का कोई भी बड़ा नेता अभी चुनावी मोड में नहीं आया है। ऐसा लग रहा है कि चार-चार कार्यकारी अध्यक्ष बनाने का फायदा कम नुकसान ज्यादा हो रहा है।
दरअसल इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पार्टी का एकमात्र कद्दावर चेहरा हरीश रावत ही हैं। प्रीतम सिंह भले ही अपना चेहरा सुंदर बताते रहे हों। लेकिन सच्चाई यही है कि भीड़ इकट्ठा करने के लिए भी पार्टी को रावत के चेहरे का ही सहारा है। अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के व्यंग्य बाणों का सामना करना करते हुए उत्तराखंड की राजनीति की पिच पर हरीश रावत एक जुझारू बैट्समैन की तरह डटे हुए हैं।
इधर, बीच-बीच में कांग्रेस के हरीश विरोधी नेता उनके लिए मुश्किल पैदा करते रहते हैं, जिसका नुकसान रावत को कम, पार्टी को ज्यादा होता है। कांग्रेसी कार्यकर्ता भी इस लड़ाई से आजिज आ चुके हैं लेकिन नेता हैं कि हरीश को आउट करने की कोशिश में पार्टी के लिये आत्मघाती गेंद फेंकने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। ऐसे में हरीश रावत चारों तरफ से घिर गए हैं। हालांकि पार्टी के नेताओं की आत्मघाती गेंदें भले ही व्यक्तिगत रूप से हरीश रावत को इंगित कर फेंकी जा रही लेकिन इसका खामियाजा अंततः कांग्रेस को ही भुगतना होगा।
कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं का निशाना सत्ताधारी भाजपा से कहीं ज्यादा हरीश रावत पर है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आगामी 2022 के चुनावों में जीत हासिल कर सत्ता में लौटने का कांग्रेस का ख्वाब हकीकत में बदल पायेगा। इस बार भी लगता है कि हरीश रावत का उनकी ही पार्टी में विरोध भाजपा के लिये सत्ता में वापसी का मार्ग प्रशस्त करने जा रहा है। जगजाहिर है कि पिछली बार भी भाजपा को प्रचंड बहुमत से सत्ता मिलने के पीछे हरीश रावत का जबरदस्त विरोध एक कारण था। इस बार फिर पार्टी के कुछ महत्वाकांक्षी नेताओं के चलते भाजपा की सत्ता में वापसी हो सकती है।
चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं रह गया है लेकिन चुनाव होने तक उत्तराखंड कांग्रेस में पांच साल पहले की स्थिति दोबारा लौटने जा रही है। इसका प्रमाण यह है कि पिछले कुछ समय से भाजपा के मंत्रियों और नेताओं द्वारा हरीश रावत पर जो राजनीतिक व्यंग्य के तीर छोड़े जा रहे हैं उनका जबाब सिर्फ और सिर्फ हरीश रावत सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से दे रहे हैं। प्रदेश स्तर के तमाम वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं के अपनी ही पार्टी के कद्दावर नेता हरीश रावत के विरूद्ध दिये जा रहे बयानों के बाद कोई प्रतिक्रिया न आना अपने आप में आश्चर्यजनक है।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal






