@विनोद भगत
कांग्रेस में पिछले पांच से अधिक दशकों से कद्दावर नेता रहीं डॉ इंदिरा ह्रदयेश का निधन पार्टी के लिये बहुत बड़ी क्षति है। राष्ट्रीय और प्रादेशिक राजनीति में डॉ इंदिरा ह्रदयेश अपने आप में कांग्रेस का एक मजबूत चेहरा थी।
अयोध्या में 7 अप्रैल 1941 को डॉ इंदिरा ह्रदयेश का जन्म हुआ था। 80 वर्षीय डॉ इंदिरा ह्रदयेश अपने अंतिम समय तक कांग्रेस के लिए सक्रिय रहीं। उन्होंने हिंदी एवं राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर तक शिक्षा प्राप्त की थी। उनका विवाह 13 अक्टूबर 1967 को ह्रदयेश कुमार से हुआ था। वह अध्यापन के जरिए राजनीति में आई थी। विभाजन से पूर्व डॉ इंदिरा ह्रदयेश उत्तर प्रदेश विधान परिषद की शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से सदस्य रही थी। 1974 में वह पहली बार गढ़वाल कुमाऊं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्य रहीं। उसके बाद इंदिरा ह्रदयेश ने राजनीति में पीछे मुड़ कर नहीं देखा। वर्ष 1986,1992 तथा 1998 में वह पुन: विधान परिषद की सदस्य बनीं। इस दौरान वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद की विभिन्न सरकारी आश्वासन समिति, प्रश्न एवं संदर्भ समिति, लखनऊ नगर निगम एवं विभिन्न विकासात्मक प्राधिकरणों की निरीक्षण समिति के अलावा उत्तर प्रदेश विधान परिषद की विधिक अधिकार समिति की सभापति तथा अधिष्ठति मंडल एवं अन्य महत्वपूर्ण समितियों की सदस्य रहीं। विधान परिषद के इतिहास में सर्वाधिक मतांतर से जीतने वाली महिला होने का रिकार्ड उनके नाम था।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद डॉ इंदिरा ह्रदयेश राज्य की अंतरिम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रही थी। नारायण दत्त तिवारी सरकार में वह लोक निर्माण, वित्त मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग की कैबिनेट मंत्री रहीं। 2002, 2012 तथा 2018 के विधानसभा चुनाव में वह उत्तराखंड विधानसभा की सदस्य निर्वाचित हुईं।
डॉ इंदिरा ह्रदयेश को उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद का दावेदार माना जाता था। उनके निधन से उत्तराखंड कांग्रेस का एक बड़ा चेहरा लुप्त हो गया है। 

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