@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
यूपी सरकार ने मुख्तार अंसारी वाली बांदा जेल से जिस कैदी के भागने का ऐलान कर दिया था और जिसे पुलिस की एक दर्जन टीमें ढूंढ रही थीं वह जेल के अंदर ही बड़ी-बड़ी घास में छुपा हुआ मिला। डीजी जेल ने घास में से उसकी बरामदगी पर खुशी ज़ाहिर की है। बांदा जेल में कल एक 22 साल का कैदी विजय आरख शाम को करीब सात बजे गायब हो गया था। दिन में वह जेल के फार्म पर खेतीबाड़ी का काम करने गया था। लेकिन बाद में वह नहीं मिला।
पहले जेल के अफसरों ने कहा कि कैदी चोर है इसलिए लगता है कि उसने खुद को जेल के अंदर ही कहीं छुपा लिया है। कैदी के गायब होने की खबर पर हंगामा हो गया। फौरन जिले के आला अफसर जेल पहुंच गए। जेल के अफसरों को उनके सीनियरों ने काफी डांट भी लगाई। सारी रात बड़ी-बड़ी लाइटें लेकर जेल वाले और पुलिस वाले उसे ढूंढते रहे. फिर सुबह सूरज की रोशनी में उसे तलाशा गया, लेकिन वह नहीं मिला।
इसके बाद डीजी जेल के दफ्तर ने कैदी के फरार होने का ऑफिशियल ऐलान कर दिया. इस मामले में सरकार की बड़ी फजीहत इसलिए हो रही थी कि क्योंकि बांदा जेल को प्रदेश की सबसे सुरक्षित जेल समझकर वहां माफिया मुख्तार अंसारी को बंद किया गया है। यही नहीं बांदा जेल के सीसीटीवी की मॉनिटरिंग लखनऊ में डीजी जेल के दफ्तर में होती है।
सरकार ने तब राहत की सांस ली जब आज बांदा जेल के डिप्टी जेलर वीरेश्वर प्रताप की नज़र “फरार” कैदी पर पड़ गई। वह जेल की बड़ी-बड़ी घास के अंदर बैठा था। जेल महकमे के मुताबिक वह एक बड़े बांस के ज़रिए जेल से भागना चाहता था। वह एक दीवार फांद भी गया था लेकिन कमर में चोट लग जाने की वजह से दूसरी दीवार नहीं फांद सका। वह मार खाने से बचने के लिए घास में छुप गया था।

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