जोशीमठ । उत्तराखंड का सुप्रसिद्ध तिमुण्ड्या मेला आज अतिसूक्ष्म रूप से मनाया गया। 2020 से पहले यह भारी संख्या में मौजूद लोगों की उपस्थिति में आयोजित होता था। श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के ठीक पूर्व में आयोजित होता था उसी परंपरा में अति सूक्ष्म रूप से पूजा – परंपराओं के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखते हुए यह कार्यक्रम आज सांय 4 बजे संपन्न किया गया ।
तिमुंडिया तीन सिर वाला वीर था। एक सिर से दिशा का अवलोकन, एक सिर से मांस खाना और एक सिर से वेदों का अध्ययन करता था। ह्यूना गांव के जगलों में इस राक्षस ने बड़ा आतंक मचा रखा था। हर दिन मनुष्य को खाता था। एक दिन मां दुर्गा देवयात्रा पर थीं। गांव वाले मां के स्वागत के लिए नहीं आए। पूछने पर पता चला की लोग तिमुंडिया राक्षस के डर से घर से बाहर नहीं निकल रहें हैं। मां दुर्गा के कहने पर उस दिन कोई नहीं जाता है। क्रोधित तिमुंडिया गर्जना करते हुए गांव में पहुंचता है। मां नवदुर्गा और तिमुंडिया का भयंकर युद्ध होता है। मां नवदुर्गा उसके तीन में से दो सिर काट देती है। च्यों ही नवदुर्गा तीसरा सिर काटने लगती हैं तो तिमुंडिया राक्षस मां के शरणागत हो जाता है। मां उसकी वीरता से प्रसन्न होकर उसे अपना वीर बना दे। 

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