देहरादून। भााजप नेता व पूर्व राज्यमंत्री मनीष वर्मा ने कोरोना महामारी से जूझती जनता को राहत देेन के लिए कुछ सुुझाव दिए हैं। मनीष वर्मा समय-समय पर सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करते रहते हैं।
आज फिर मनीष वर्मा ने सूबे की सरकार को जनोपयोगी सुझाव दिये हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक फिल्म आई थी “जोधा अकबर ” उसमे रानी जोधा बाई ने राजा अकबर को कहा कि आप कुछ ऐसा करें कि जनता आपको सर आंखों पर बैठा ले और युगों युगों तक आपकी गाथा लिखी जाए.. तब राजा अकबर खुद जनता के बीच गए और जनता के मर्म को समझा और उस समय की सबसे आवश्यक जरूरत यानी सबकी यात्रा पर लगने वाला “महसूल” यानी “कर” माफ कर दिया और कालांतर में हुआ भी ऐसा ही और आज के युग में राजा अकबर पर फिल्म भी बनी ।
आज पूरा राज्य,देश सहित विश्व कोरोना महामारी के दंश को झेल और उससे जूझ रहा है और हर व्यक्ति भयभीत,आशंकित है। हालांकि 2020 में भी कोरोना की वेव आई थी और जनता इसी प्रकार घबराई थी और लॉक डाउन जैसे नियम लागू किए गए थे और उस समय भी विभिन्न स्रोतों से दूसरी वेव की बात कही गई थी और विश्व स्तर पर जनता को चेताया भी गया था पर जैसे ही लॉक डाउन हटा वैसे ही लोग सब भूल गए और सब रूटीन में कार्य होने लगा । चुनाव घोषित हो गए, शादियां घोषित हो गईं,पार्टियां शुरू हो गई,मंडिया और बाजारों में फिर से भीड़ भाड़ हो गई और लोग कोरोना वायरस को भूल गए ।
अब कोरोना की दूसरी लहर आ गई है और अब अलग अलग प्लेटफार्म पर तीसरी लहर की बात भी कही जा रही ही जो अभी सिर्फ अप्रत्याशित है पर इस दौरान कष्ट और परेशानी से आम जन मानस पर इसका क्या फर्क पड़ा है,यह जनता के मर्म को समझने पर ही पता चलता है । हम ये नही कह रहे की इसके लिए सरकार जिम्मेदार है अपितु जिम्मेदार आम जनता भी लापरवाही के लिए बराबर जिम्मेदार है पर हल तो ढूंढना ही होगा ।
पहले इलाज ,फिर वैक्सीन उसके बाद हॉस्पिटल के विभिन्न बैड और अब बैड के बाद ऑक्सीजन जैसे महत्व पूर्ण तथ्य सभी के सामने है और सभी जाने अंजाने किसी खतरे से भयभीत है और ऑक्सीजन के बाद अब देखभाल करने वालें हॉस्पिटल स्टाफ को पूर्ण करना अगली चुनौती होगा क्योंकि हॉस्पिटल पर हॉस्पिटल और बैड पर बैड घंटो में बढ़ते जा रहे है पर स्टाफ भर्ती भी देखना बहुत आवश्यक होगा ।
कौन किसकी और किस रूप में मदद कर रहा है सभी अप्रत्याशित रूप से हो रहा ही है बहुत सारे व्हाट्सअप ग्रुप ,फेसबुक ग्रुप चल रहे है और सभी जाने अनजाने किसी न किसी की मदद किस रूप में कर रहे है, चाहे वो बैड,ऑक्सीजन, वेक्सीन,या इंजेक्शन की जानकारी ही देकर हो । जाने अनजाने कोई न कोई किसी न किसी की मदद कर रहा है।
हालांकि उत्तराखंड में राजनीतिक उठा पटक ऐसी रहती हैं की जब तक मुख्यमंत्री अपने कार्य को समझ पाते है तब तक कुछ अलग प्रकार की ब्यूरोक्रेसी के लोग या राजनीतिक लोग यहां ऐसी चाल चलते हैं कि मुख्यमंत्री ही बदल जाते हैं, स्वo तिवारी जी के 5 साल छोड़ कर 15 सालो का इतिहास भी ऐसा ही है और सभी बखूबी इसे जानते भी है ।
जो बात हम पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को लिख कर,बता कर संदेश देकर कहते रहे वही आज वर्तमान मुख्यमंत्री को भी लिख रहे है और यह किसी पार्टी के मुख्यमंत्री को न लिख कर उस संवैधानिक पद पर बैठे महानुभाव को लिखी जा रही ही जो सबके लिए समान होते है , और उनके लिए उस शपथ का हिस्सा होती है जिसमे वो कहते है कि ” मै अपने कर्तव्यों का शुद्ध अंतःकरण से निर्वहन करूंगा तथा भय या पक्षपात ,अनुराग या द्वेष के बिना सब प्रकार के लोगो के प्रति संविधान और विधि अनुसार न्याय करूंगा ” तो इन्ही वाक्यो को आगे बढ़ाते हुए कुछ ऐसे मुद्दे है जिनको यदि आप फलीभूत कर देंगे तो आपकी चारो ओर जय जयकार तो होगी ही साथ ही आपकी और पार्टी के प्रति जनता आभार व्यक्त के रूप में पुनः भाजपा को एक मौका भी दे सकती है ।
जनता के दिलो में जो दर्द है वो उनको उनके दुखों और दर्द से रियायत करके ही दिया जा सकता है क्योंकि बाकी जो हो रहा है वो तो सरकार की जिम्मेदारी है और और सबको उसका अधिकार भी है ।
वर्तमान में जो जनता की आवाज हमने सुनी ही वो हम आपको यहाँ सूचनार्थ उपलब्ध करवा रहे है क्योंकि कोरोना के चलते समय मांगना तो उचित नहीं और मिलना तो दूर की बात है इसलिए इस लेख के माध्यम से अपना पत्रकारिता धर्म निभाते हुए आपको यहां अवगत करवाया जा रहा है
1. जनता चाहती है कि कोरोना काल के दौरान जबकि सब बंद है, बच्चो की स्कूल फीस माफ कर दी जाए ।
2.जनता चाहती है कि कोरोना काल के दौरान जबकि सब तीर्थ यात्रा आदि बंद है, होटल्स/ रेस्टोरेंट/पर्यटन/टैक्सी आदि से संबंधित सभी टैक्स माफ कर दिया जाए
3. जनता चाहती है कि कोरोना काल के दौरान जबकि सब बंद है, बिजली/पानी/हाउस टैक्स का बिल माफ कर दिया जाए ।
4.जनता चाहती है कि कोरोना काल के दौरान जबकि सब बंद है, जिन मजदूरों,दैनिक कर्मियो,रिक्शा/टेम्पु/बस चालक/ संविदा कर्मियों को मुआवजा के रूप में खाने रहने का मासिक उचित भुगतान कर दिया जाए ।
मुख्यमंत्री जी, जैसा की मै समझता हू इन सब खर्चों से राज्य सरकार पर उतना बोझ नहीं पड़ने वाला जितना की 20 सालो में आज तक के विधायक,मंत्रियों को दी जाने वाली पेंशन का भुगतान होता होगा और यदि फिर भी कम हो तो आप 90 दिन के लिए हमे इसकी जिम्मेदारी दे दीजिएगा हम सरकार के घाटे की भरपाई का रास्ता बता देंगे । संविधान के अनुसार कटीगेंसी और कोंसोलिडेट फंड का उपयोग कर इजाफा का प्राविधान भी विशेषज्ञों के द्वारा भी ढूंढ दिया जाएगा ।
बहरहाल जो जनता के बीच जाकर सुना,देखा और समझा आपको इस लेख के माध्यम से अवगत करवा दिया और आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास ही कि आप इस संबंध में अवश्य विचार करते हुए उचित निर्णय लेंगे और उत्तराखंड में एक नया इतिहास कायम करेंगे जिससे आने वाली पीढ़ी स्वर्ण अक्षरों में इस गाथा को लिखेगी । मनीष वर्मा ने राज्य के पत्रकारों का भी इस कोरोना महामारी में विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता पर बल दिया है। 

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