@शब्द दूत ब्यूरो
देहरादून। यह शायद पहली बार हुआ है कि सत्ता कड़क पुलिस प्रशासन के आगे हार गई। उत्तराखंड में यह यह अपने आप में पहला मामला है। काशीपुर में दबंग के पुलिस अफसरों के रूप के आगे सत्ता धारी विधायकों की नहीं चली। पुलिस प्रशासन के इस कड़े रुख से काशीपुर के तमाम भाजपा नेता यहाँ तक कि प्रदेश अध्यक्ष और सासंद को भी पुलिस के आदेश का आम नागरिकों की तरह पालन करना पड़ा। वैसे होना यह चाहिए था कि कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी का पालन करने पर काशीपुर पुलिस प्रशासन की सत्ता को तारीफ करनी चाहिए थी। पर हुआ इसका उल्टा भाजपा विधायक और नेताओं ने कानून व्यवस्था संभालने के पुलिस के इस कार्य की निंदा की।
यहाँ बता दें कि हाल ही में आये एएसपी राजेश भट्ट अपने कड़े अनुशासन और कानून व्यवस्था पर गंभीर पुलिस अधिकारी माने जाते हैं। भाजपा नेताओं ने तमाम कोशिशें रैली के लिये की लेकिन अंततः सासंद अजय भट्ट विधायक हरभजन सिंह चीमा समेत तमाम बड़े भाजपा नेताओं के प्रयास असफल रहे।
पुलिस प्रशासन से खार खाये भाजपा नेताओं ने आरोप लगाये कि राष्ट्रीय हित के कार्यक्रम की रैली की अनुमति न देना दुखदायी है। वैसे स्थानीय विधायक हरभजन सिंह चीमा समय-समय पर पुलिस की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन इस बार उन्होंने कानून व्यवस्था बनाए रखने की पुलिस की कोशिश पर ही सवाल उठा दिये हैं। क्या इस कारण से किसी पुलिस अधिकारी का स्थानांतरण होने की संभावना है।
विधायक का आरोप है कि ऊधमसिंह नगर जिले की पुलिस ने पार्टी के राष्ट्रीय अभियान को विफल किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने इस मामले में जिला पुलिस अफसरों की जमकर खबर ली। दूसरी और एक पूर्व विधायक ने पुलिस के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाकर अपनी ताकत का अहसास कराया।
जिला पुलिस ने केवल काशीपुर के विधायक को ही अपनी ताकत का अहसास नहीं कराया, बल्कि, खटीमा, सितारगंज, किच्छा और नानकमता के विधायकों को भी रैली निकालने की अनुमति नहीं दी। अलबत्ता जसपुर की घटना के बाद रुद्रपुर के विधायक राजकुमार ठुकराल ने जरूर रैली निकाली।




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