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काशीपुर :निजी स्कूलों की मनमानी पर खंड शिक्षा अधिकारी की दो टूक “किताब-ड्रेस के लिए अभिभावकों पर दबाव नहीं बना सकते स्कूल”फीस वृद्धि की लिखित शिकायत आई तो होगी कार्रवाई, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (08 अप्रैल 2026)

काशीपुर। काशीपुर में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस, हर साल किताबों और ड्रेस में बदलाव, आरटीई सीटों में पारदर्शिता और स्कूलों की मनमानी जैसे मुद्दों को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इन तमाम सवालों पर काशीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र कुमार साहू ने स्पष्ट कहा है कि कोई भी निजी विद्यालय अभिभावकों को किसी खास दुकान, प्रकाशक या विद्यालय से ही किताबें, कॉपियां या ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

उन्होंने बताया कि हाल ही में रुद्रपुर में निजी विद्यालय प्रबंधन के साथ हुई बैठक में यह साफ निर्देश दिए गए हैं कि स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही पठन-पाठन कराया जाए। जिन विषयों की किताबें एनसीईआरटी से उपलब्ध नहीं हैं, वहां समकक्ष और उचित मूल्य वाली पुस्तकें ही लागू की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्य शिक्षा अधिकारी की ओर से एक विस्तृत एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी की जा चुकी है, जिसे काशीपुर क्षेत्र के सभी निजी मान्यता प्राप्त विद्यालयों, सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों को भेज दिया गया है।

खंड शिक्षा अधिकारी ने ड्रेस को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी स्कूल हर साल बिना पूर्व सूचना के ड्रेस नहीं बदल सकता। यदि किसी विद्यालय को ड्रेस बदलनी है तो उसे पहले अभिभावकों को इसकी जानकारी देनी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि किसी एक अधिकृत दुकान से ही ड्रेस खरीदने का दबाव बनाना नियमों के खिलाफ है।

आरटीई (शिक्षा का अधिकार) के तहत प्रवेश लेने वाले बच्चों से किसी भी प्रकार की फीस वसूली पर भी उन्होंने साफ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि आरटीई के अंतर्गत आने वाले बच्चों को निशुल्क शिक्षा देना अनिवार्य है और इस श्रेणी में किसी भी प्रकार का शुल्क लेना नियम विरुद्ध है। उन्होंने बताया कि आरटीई के तहत विद्यालयों में लोअर क्लास में पिछले तीन वर्षों के औसत प्रवेश का 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जाती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि इस बार आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को लेकर जिले में बेहतर स्तर पर काम हुआ है। पहले जो कमियां सामने आती थीं, उन्हें दूर करने के लिए विभागीय कार्यशालाएं आयोजित की गईं। अब यह सुनिश्चित किया गया है कि संबंधित वार्ड के बच्चों को पहले उसी वार्ड के स्कूलों में अवसर मिले, और सीट न मिलने की स्थिति में नजदीकी वार्डों में मौका दिया जाए।

बातचीत में स्कूलों में एक ही कक्षा में 60 से 70 बच्चों को बैठाकर पढ़ाने का मुद्दा भी उठा। इस पर खंड शिक्षा अधिकारी ने कहा कि कक्षाओं में बच्चों की संख्या को लेकर पहले से निर्धारित मानक हैं। यदि बच्चों की संख्या तय सीमा से अधिक होती है, तो विद्यालय को अलग सेक्शन बनाना अनिवार्य होता है। उन्होंने कहा कि सामान्य रूप से 40 विद्यार्थियों के बाद नया सेक्शन बनाया जाना चाहिए और किसी भी कक्षा को ओवरलोड नहीं किया जा सकता।

फीस बढ़ोतरी को लेकर उन्होंने कहा कि अभी तक विभाग को कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। लेकिन यदि कोई शिकायत आती है, तो उस पर जांच और कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी मामले में गंभीरता पाई जाती है तो उसे तत्काल मुख्य शिक्षा अधिकारी के संज्ञान में लाया जाएगा।

जब उनसे पूछा गया कि निजी स्कूलों पर खंड शिक्षा अधिकारी का नियंत्रण नहीं होने के आरोप लगते हैं, तो उन्होंने कहा कि ऐसा कहना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाग के नियम और निर्देश सभी निजी विद्यालयों पर लागू होते हैं और उनका पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है। यदि किसी भी स्कूल द्वारा एसओपी या नियमों का उल्लंघन किया जाता है, तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।

खंड शिक्षा अधिकारी ने जानकारी दी कि काशीपुर खंड में लगभग 350 विद्यालय संचालित हैं। इनमें सरकारी और निजी दोनों तरह के विद्यालय शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में करीब 90 प्राथमिक विद्यालय, 25 राजकीय प्राथमिक विद्यालय, 25 जूनियर हाई स्कूल, मान्यता प्राप्त विद्यालयों के अलावा हाईस्कूल और इंटर कॉलेज भी संचालित हैं।

नए सत्र में प्रवेश लेने वाले बच्चों और अभिभावकों के लिए उन्होंने सरकारी स्कूलों को बेहतर विकल्प बताते हुए कहा कि यहां पूर्णतः निशुल्क शिक्षा उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि हाल ही में सरकारी स्कूलों में प्रवेश उत्सव मनाया गया, जिसमें नए बच्चों का स्वागत तिलक, जलपान और सम्मान के साथ किया गया। बच्चों को पुस्तकें, स्टेशनरी और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गईं।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों में बच्चों को निशुल्क गणवेश, बैग, पाठ्य पुस्तकें, मध्यान्ह भोजन, साप्ताहिक अतिरिक्त पोषाहार, दूध, फोलिक एसिड, आयरन और कैल्शियम की गोलियां, साथ ही नियमित स्वास्थ्य परीक्षण जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। जिन बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं मिलती हैं, उन्हें आगे उपचार के लिए रेफर भी किया जाता है।

सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है। काशीपुर ब्लॉक में दो अटल उत्कृष्ट विद्यालय—जीआईसी प्रतापपुर और जीआईसी महुआखेड़ागंज—सीबीएसई पैटर्न और अंग्रेजी माध्यम शिक्षा की दिशा में काम कर रहे हैं। इसके अलावा कई निपुण विद्यालय भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जहां प्रवेश की मांग लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने कहा कि यह कहना गलत होगा कि लोग सिर्फ निजी स्कूलों की ओर ही जा रहे हैं। सरकारी स्कूलों में भी लगातार सुधार हो रहा है और विभाग का प्रयास है कि बेहतर गुणवत्ता वाली शिक्षा कम खर्च या निशुल्क उपलब्ध कराई जाए।

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि यह समस्या पूरी तरह स्थायी नहीं है, क्योंकि विभाग में लगातार भर्तियां और नियुक्तियां होती रहती हैं। जहां कहीं रिक्तियां हैं, उनकी जानकारी उच्च स्तर पर भेजी जाती है और उन्हें भरने की प्रक्रिया चलती रहती है।
कुल मिलाकर, निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली, फीस, ड्रेस, किताबें और आरटीई जैसे मुद्दों पर खंड शिक्षा अधिकारी का यह बयान अभिभावकों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि विभागीय निर्देशों और एसओपी का पालन निजी स्कूल कितनी गंभीरता से करते हैं।

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