@शब्द दूत ब्यूरो (31 मार्च 2026)
काशीपुर। शहर में आयोजित होने वाला चैती मेला न केवल मनोरंजन का केंद्र है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास और सांस्कृतिक समझ के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। डी बाली ग्रुप की डायरेक्टर उर्वशी दत्त बाली ने मेले के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हम सभी सौभाग्यशाली हैं कि हमारे शहर में ऐसा पारंपरिक मेला आयोजित होता है, जो हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां बच्चों को आधुनिक सुविधाओं, लग्ज़री जीवनशैली और तकनीकी दुनिया से परिचित कराया जाता है, वहीं यह भी जरूरी है कि उन्हें जीवन की वास्तविकता से रूबरू कराया जाए। मेले में बच्चे देखते हैं कि सीमित संसाधनों में भी लोग अपने हुनर और मेहनत के बल पर आगे बढ़ते हैं।
उर्वशी दत्त बाली के अनुसार, मेला बच्चों के लिए एक जीवंत पाठशाला की तरह है, जहां वे केवल मनोरंजन नहीं करते, बल्कि जीवन के महत्वपूर्ण मूल्य भी सीखते हैं—जैसे संतोष, संघर्ष, आत्मविश्वास और खुश रहकर आगे बढ़ना। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे हमें भी बहुत कुछ सिखा जाते हैं, खासकर विपरीत परिस्थितियों में मुस्कुराने का जज्बा।
उन्होंने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को ऐसे मेलों में अवश्य लेकर जाएं, ताकि वे केवल सपने देखना ही नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करने का रास्ता भी समझ सकें। साथ ही बच्चे यह भी जान पाते हैं कि मेले क्यों लगाए जाते हैं, उनकी ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि क्या है, और हमारी सांस्कृतिक विरासत कितनी समृद्ध है।
उन्होंने कहा कि बच्चों को हर बात समझाने की आवश्यकता नहीं होती, वे बहुत कुछ देखकर और अनुभव करके भी सीखते हैं। ऐसे में मेले जैसे आयोजन उनके व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
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