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काशीपुर चैती मेला: महंगाई की मार से कराहते दुकानदार,महंगी दुकानों और कम बिक्री की दोहरी मार ने बढ़ाई चिंता, देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (28 मार्च 2026)

काशीपुर।  चैती मेले में इस बार रौनक तो दिख रही है, लेकिन दुकानदारों के चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही है। बढ़ती महंगाई और कम होती बिक्री ने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। कई दुकानदारों का कहना है कि इस बार मेला उम्मीदों के विपरीत बेहद कमजोर साबित हो रहा है।

मुरादाबाद से आए दुकानदार जितेंद्र कुमार बताते हैं कि इस बार बिक्री इतनी कम है कि मेहनत का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि पहले मेले के शुरुआती दो-तीन दिनों में ही आधे से ज्यादा माल बिक जाता था, जबकि अब दुकानें खाली पड़ी हैं और ग्राहक कम नजर आ रहे हैं। वे बताते हैं कि अब मिक्सी जैसे आधुनिक उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से सिलबट्टे जैसे पारंपरिक उत्पादों की मांग भी घट गई है।

दुकानदारों के अनुसार, मेले में दुकान लगाने का किराया भी इस बार बेहद अधिक है। कई दुकानों का किराया एक लाख रुपये तक पहुंच गया है, जिससे छोटे व्यापारियों के लिए लागत निकालना चुनौती बन गया है। व्यापारियों का कहना है कि वे प्रति सामान मुश्किल से 10-20 रुपये ही कमा पाते हैं, जबकि ग्राहक महंगाई का हवाला देकर खरीदारी से बच रहे हैं।

अमरोहा से आए ढोलक विक्रेता भूरे खान बताते हैं कि कच्चे माल की कीमतों में भी भारी वृद्धि हुई है। पहले जो ढोलक 200-300 रुपये में बिकती थी, अब उसकी कीमत 2500-3000 रुपये तक पहुंच गई है। इसके बावजूद ग्राहक पुराने दामों की उम्मीद रखते हैं, जिससे बिक्री प्रभावित हो रही है।

व्यापारियों का यह भी कहना है कि जब मेला प्रशासन के हाथ में आया तब से खर्चे बढ़ गए हैं और व्यवस्थाएं भी पहले जैसी नहीं रहीं। उनका आरोप है कि ठेकेदारों द्वारा अत्यधिक शुल्क वसूला जा रहा है, जिसका सीधा असर दुकानदारों और ग्राहकों दोनों पर पड़ रहा है।

दुकानदार बताते हैं कि हर साल कारोबार लगातार गिरता जा रहा है। उनका कहना है कि पहले ढोलक हर घर की जरूरत होती थी, लेकिन अब इसका चलन कम हो गया है। महंगाई और बदलती जीवनशैली ने पारंपरिक कारोबार को प्रभावित किया है।

दुकानदारों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में मेले की परंपरा और उनसे जुड़े लोगों की रोजी-रोटी दोनों संकट में पड़ सकती हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मेले के किराए और व्यवस्थाओं पर नियंत्रण किया जाए, ताकि छोटे व्यापारियों को राहत मिल सके और मेले की पुरानी रौनक वापस लौट सके।

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