@शब्द दूत ब्यूरो (24 मार्च 2026)
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में देश का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि हालात चिंताजनक हैं और इस युद्ध का असर लंबे समय तक रह सकता है। उन्होंने आगाह किया कि देश को COVID-19 जैसे संकट की तरह तैयार रहने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने बताया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे कई भारतीय जहाज सुरक्षित वापस लाए जा चुके हैं, हालांकि इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरी कदम उठा रही है ताकि पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो।
सरकार की तैयारियों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में इथेनॉल उत्पादन और ब्लेंडिंग में बड़ा बदलाव आया है। जहां पहले देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग 1-1.5% थी, अब यह करीब 20% तक पहुंच गई है। इसके चलते हर साल लगभग साढ़े 4 करोड़ बैरल कच्चे तेल के आयात में कमी आई है, जिससे ऊर्जा संकट के समय भारत को राहत मिल रही है।
प्रधानमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि युद्ध के बीच 3.75 लाख से अधिक भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया है, जबकि ईरान से करीब 1,000 भारतीयों की वापसी हो चुकी है, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60% आयात करता है, इसलिए आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रही है और उत्पादन बढ़ाने के प्रयास भी जारी हैं।
उधर, ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध के 24वें दिन वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। भारत में भी गैस की किल्लत की आशंका को लेकर विपक्ष सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठा रहा है, जिनका जवाब प्रधानमंत्री ने संसद में दिया।
सरकार ने साफ किया है कि संकट के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति फिलहाल सुचारू रूप से जारी है और आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
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