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काशीपुर में निःशुल्क एक्यूप्रेशर प्रशिक्षण शिविर: “हर घर में एक व्यक्ति सीखे, दवा रहित उपचार अपनाए”देखिए वीडियो

@शब्द दूत ब्यूरो (11 फरवरी 2026)

काशीपुर। प्रयागराज एक्यूप्रेशर शोध संस्थान द्वारा काशीपुर में निःशुल्क एक्यूप्रेशर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जा रहा है। संस्थान से आये डॉ अमर प्रताप सिंह ने  बताया कि यह कार्यक्रम लखनऊ शाखा के माध्यम से संचालित हो रहा है और इसका उद्देश्य जन-जन तक दवा रहित उपचार की प्राचीन भारतीय विद्या को पहुंचाना है।

उन्होंने बताया कि संस्थान की स्थापना लगभग 30 वर्ष पूर्व प्रयागराज में गंगा तट पर की गई थी। वर्तमान में देशभर में 400 से अधिक केंद्र संचालित हैं और 50 से अधिक चिकित्सक इस पद्धति से जुड़े हैं। संस्था का मोटो “ईच वन, टीच वन – ईच वन, रीच वन – ईच वन, ट्रीट वन” है, ताकि हर घर में कम से कम एक व्यक्ति इस विद्या को सीखकर परिवार और समाज की सेवा कर सके।

ब्रह्मकुमारी आश्रम में चल रहा प्रशिक्षण

डॉ अमर प्रताप सिंह ने बताया कि काशीपुर में उन्हें तीन माह हो चुके हैं और पूर्व में भी दो-तीन शिविर लगाए जा चुके हैं। वर्तमान में ब्रह्मकुमारी आश्रम में 15 दिवसीय शिविर संचालित है, जिसमें 9 दिन सैद्धांतिक ज्ञान और शेष दिन प्रायोगिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
सुबह 8 से 9 बजे तक आश्रम में निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है, वहीं जो लोग सुबह नहीं आ पाते, उनके लिए शाम 5 से 6 बजे आवास विकास क्षेत्र में डॉक्टर बी.सी. जोशी के सामने कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं।

उनके अनुसार अब तक काशीपुर में लगभग 400–500 लोगों को परामर्श एवं उपचार दिया जा चुका है और 10–12 लोग यहां डिप्लोमा कोर्स भी कर रहे हैं तथा सेवा कार्य में समय दे रहे हैं।

“सारा शरीर हमारे हाथों में”

प्रशिक्षण के दौरान बताया जा रहा है कि मानव शरीर के विभिन्न अंगों के बिंदु हथेली और पैरों में स्थित होते हैं। उंगलियों और हथेली के अलग-अलग हिस्सों को दबाकर विभिन्न रोगों में राहत देने का दावा किया गया।
संस्थान का कहना है कि नियमित अभ्यास से डायबिटीज, बीपी, गठिया जैसी बीमारियों से बचाव संभव है तथा आपातकालीन स्थितियों में भी कुछ बिंदुओं पर दबाव देने से राहत मिल सकती है।

रंग और चुंबक पद्धति भी शामिल

एक्यूप्रेशर के साथ ‘स्केच कलर पद्धति’ और चुंबक चिकित्सा का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रतिनिधि ने बताया कि शरीर की ऊर्जा संतुलन के लिए विभिन्न रंगों और चुंबकों का उपयोग किया जाता है। उनका दावा है कि इससे शरीर की ऊर्जा संतुलित होती है और रोगों की जड़ पर कार्य किया जाता है।

डिप्लोमा कोर्स और सरकारी मान्यता की प्रक्रिया

संस्थान के अनुसार प्रयागराज में “माता प्रसाद खेमका एक्यूप्रेशर महाविद्यालय” संचालित है, जहां तीन वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी कराया जाता है। ऑनलाइन पाठ्यक्रम की सुविधा भी उपलब्ध है।
उन्होंने बताया कि आयुष मंत्रालय स्तर पर सर्वे और प्रक्रियाएं चल रही हैं तथा भविष्य में इसे व्यापक मान्यता मिलने की उम्मीद है।

उद्देश्य: बीमारी से बचाव की जागरूकता

संस्थान का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ती बीमारियों को देखते हुए एक्यूप्रेशर जैसी प्राकृतिक पद्धति को अपनाने की आवश्यकता है। उनका उद्देश्य है कि लोग एक घंटे का समय निकालकर इस विधा को सीखें, ताकि छोटी-मोटी बीमारियों का स्वयं उपचार कर सकें और स्वस्थ जीवन जी सकें।

संस्थान ने काशीपुर और आसपास के लोगों से अपील की है कि वे निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर में पहुंचकर इस प्राचीन भारतीय पद्धति का लाभ उठाएं।

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